इस्लामाबाद: पाकिस्तान की यात्रा पर पहुंचे मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने सार्क (SAARC) का राग अलापा है। मालदीव में इंडिया आउट अभियान चलाने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने पाकिस्तान की धरती पर खड़े होकर सार्क शिखर सम्मेलन को जल्द आयोजित करने की अपील की। मुइज्जू ने कहा कि मालदीव इस शिखर सम्मेलन को आयोजित करने के लिए दूसरे सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। वे एक दशक से भी अधिक समय बाद पाकिस्तान पहुंचने वाले मालदीव के पहले राष्ट्रपति हैं।पाकिस्तान में रद्द हुआ था शिखर सम्मेलन
मुइज्जू का बयान भारत की चिंता बढ़ा सकता है। इसके पहले आखिरी सार्क शिखर सम्मेलन नवम्बर 2024 में काठमांडू में हुआ था। इसके बाद यह 2026 में इस्लामाबाद में आयोजित किया जाना था, लेकिन जम्मू-कश्मीर के उरी में सीमा पार से हुए आतंकी हमले के कारण इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद से यह प्रक्रिया रुकी हुई है।भारत का कहना है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के तहत सहयोग तभी संभव है, जब माहौल आतंकवाद से मुक्त हो। भारत ने साफ कहा है कि ऐसा माहौल बनाना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है।
मुइज्जू ने की SAARC को शुरू करने की मांग
इस्लामाबाद की यात्रा पर पहुंचे मुइज्जू ने उम्मीद जताई कि सार्क क्षेत्र के देशों के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि इस संगठन के माध्यम से हम इस क्षेत्र के देशों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।"मुइज्जू ने कहा, "सार्क के कामकाज को फिर से शुरू करने के लिए मालदीव सदस्य देशों के साथ चर्चा करने को तैयार है। निरंतर बातचीत, विश्वास और समझ के जरिए हम सार्क के भीतर सहयोग को मजबूत कर सकते हैं।" मुइज्जू पहले भी सार्क को फिर से सक्रिय करने की बात कर चुके हैं। इस साल मालदीव के स्वतंत्रता दिवस भाषण में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया था, ताकि दोनों देशों के नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
सार्क क्या है?
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ यानी सार्क की स्थापना 1985 में ढाका में हुई थी। इसकी शुरुआत 7 देशों- बांग्लादेश, भूटाना, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका- ने मूल सदस्य के रूप में की थी। साल 2006 में आयोजित 13वें शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान को भी इसमें शामिल किया गया। इसकी स्थापना एक ऐसे संगठन के रूप में की गई थी, जिसका उद्येश्य एक जुड़ा हुआ और एकीकृत दक्षिण एशिया बनाना था।
सार्क को लेकर भारत के कदम पीछे खींचने के बाद यह संगठन ठंडे बस्ते में चला गया है। सार्क की बैठक न होने से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है और इसके लिए भारत पर निशाना साधता रहता है। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान को ही जिम्मेदार ठहराया है, जिसने आतंकवाद को अपना मेन एजेंडा बनाकर दक्षिण एशिया में सहयोग की पहल को रोक रखा है। मालदीव के अलावा बांग्लादेश और नेपाल जैसे सदस्य देश भी समय-समय पर इस संगठन का शिखर सम्मेलन करने की मांग करते रहे हैं।