'असम पर टाइपिंग की गलती है तो साफ बताएं', भारतीय प्रतिनिधि ने UN के स्पेशल दूत को लिया आड़े हाथ, चेताया
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22-10-2026 11:41 AM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा की समिति में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि बरखा ताम्रकार ने असम और भारत के नक्शे को लेकर सख्त रुख दिखाया है। ताम्रकार ने भारत पर की गई टिप्पणियों और असम को 'उत्तर भारत' के हिस्से के रूप में पेश करने की कोशिश को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक (UN स्पेशल रैपोर्टियर) को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजों से बचा जाना चाहिए और साफ-साफ जवाब दिए जाने चाहिए।बरखा ताम्रकार ने संयुक्त सभा के अपने भाषण में कहा, 'अगर उनका इशारा असम की तरफ है तो उन्हें साफ-साफ कहना चाहिए। टाइपिंग की गलती या किसी अस्पष्ट भौगोलिक शब्द का इस्तेमाल करके ऐसे आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं।' उन्होंने कहा कि असम या भारतीय क्षेत्र पर कोई भी टिप्पणी संभलकर होनी चाहिए।मानवाधिकार मुद्दे पर भी घेरा
भारत ने यूएन में मानवाधिकारों का इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार के रूप में करने का विरोध किया है, जिसका मकसद बिना पुष्टि वाले आरोपों के आधार पर चुनिंदा देशों को निशाना बनाना होता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि बरखा ताम्रकार ने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।ताम्रकार ने कहा, 'भारत स्थापित माध्यमों के जरिए, उचित दस्तावेजों वाले विशिष्ट मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार है। हम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों के साथ ऐसी बातचीत चाहते हैं, जो संवाद, परामर्श, सहयोग और पारदर्शिता पर आधारित हो। हम प्रतिनिधिमंडलों से आग्रह करते हैं कि वे रिपोर्टों का हवाला देते समय पूरी ईमानदारी बरतें और मानवीय मामलों से जुड़े संदेशों को किसी अंतिम फैसले की तरह ना समझें।'भारत में मौजूद सुरक्षा उपायों का जिक्र करते हुए बरखा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी दी गई है। देश में स्वतंत्र न्यायपालिका हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) जैसी रिट जारी कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग, सूचना का अधिकार कानून, मीडिया और नागरिक समाज पारदर्शिता, जवाबदेही और शिकायतों के निवारण के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं।