वॉशिंगटन: अमेरिका के डॉक्टर एडवर्ड ल्योन ने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में चार दशक पर यूरोलॉजिस्ट के तौर पर काम किया। एक बड़े परिवार के मुखिया एडवर्ड वह चाहते थे कि उनकी जिंदगीभर की बचत (रिटायरमेंट सेविंग्स) उनके 36 पोते-पोतियों को मिले। साल 2019 में जब उनका निधन हुआ तो उन्होंने 1.2 मिलियन डॉलर (11 करोड़ से ज्यादा भारतीय रुपए) की रिटायरमेंट सेविंग्स अपने पोते-पोतियों के लिए छोड़ा। हालांकि सात साल बीत जाने के बाद भी यह पैसा ल्योन के बच्चों तक उन तक नहीं पहुंचा है। ऐसा कुछ कागजी दिक्कतों के कारण हुआ है। अब सवाल है कि क्या परिवार अपने दादा के पैसों से खाली हाथ रह जाएगा।एडवर्ड ल्योन की बचत का उनके पोते-पोतियों को ना मिलने की वजह बेनिफिशियरी फॉर्म, जीवनसाथी की सहमति और पावर ऑफ अटॉर्नी की सीमाओं पर विवाद है। इस मामले में फिलहाल फेडरल कोर्ट में अपील चल रही है। दरअसल एडवर्ड ल्योन ने अलग-अलग ट्रस्ट के जरिए अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स अपने 36 पोते-पोतियों तक पहुंचाने की योजना बनाई थी लेकिन उनकी मौत के बाद चीजें उलझ गईं।2014 में बनाई वसीयत
एडवर्ड ल्योन और वैलेरी 68 साल तक विवाहित रहे। उनके 12 बच्चे और 36 पोते-पोतियां हुईं। 2014 में जब दोनों 80 साल के हुए तो उन्होंने अपनी संपत्ति योजना को अपडेट किया। उन्होंने अपनी बेटी ऐलिस और उनके पति डैन डेविस को वित्तीय फैसलों के लिए एजेंट नियुक्त किया। उनके फैमिली ट्रस्ट को अपडेट करके उसमें 36 ट्रस्ट शामिल किए गए यानी हर पोते-पोती के लिए एक ट्रस्ट लाया गया। ताकि एडवर्ड की मौत के बाद उनको पैसा मिल सके।
ल्योन के पोते-पोतियों को हर साल एक तय रकम मिलनी थी- आधी उनके जन्मदिन पर और आधी क्रिसमस पर। 60 साल की उम्र के बाद उन्हें यह पैसा मासिक भुगतान के रूप में मिलना था। इस तरह नई पीढ़ी को पैसा सौंपने का मकसद यह था कि उन्हें कई दशकों तक टैक्स-डेफर्ड (टैक्स टलने वाली) ग्रोथ का फायदा मिल सके।कोर्ट में उलझा मामला
पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत 2019 में साइन किए गए बेनिफिशियरी फॉर्म को रिकॉर्ड रखने वाली संस्था TIAA ने खारिज कर दिया। दरअसल 2019 तक एडवर्ड बीमार थे। डेविस ने बताया कि वह बेनिफिशियरी की जानकारी चेक करने के लिए TIAA की वेबसाइट पर गए, जहां उन्हें वही चीजें दिखी जो पहले से फाइल में दर्ज थी। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने फोन किया, तो प्रतिनिधि के पास उस अपडेट का कोई रिकॉर्ड नहीं था, इसलिए चीजें अटक गईं।अदालती दस्तावेजों के अनुसार, टीआईएए ने लिखा कि वह 2019 के फॉर्म को संसाधित नहीं कर सका क्योंकि उस पर विधिवत दस्तखत नहीं थे। वैलेरी का दिसंबर 2020 में निधन हो गया। जनवरी 2022 में टीआईएए ने परिवार को बताया कि पावर ऑफ अटॉर्नी ने डेविस को उनके लिए वैवाहिक अधिकारों के त्यागपत्र पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं दिया था। जब परिवार ने विरोध किया, तो टीआईएए ने उन्हें विश्वविद्यालय से संपर्क करने का सुझाव दिया।यूनिवर्सिटी प्लान के नियमों और कानून से बंधी है, जबकि TITA की भूमिका केवल प्रशासनिक थी। डेविस को अभी भी हर महीने स्टेटमेंट मिल रहे हैं और अकाउंट का बैलेंस बढ़कर 1.7 मिलियन डॉलर हो गया है।
TIAA
परिवार को क्या नुकसान हो सकता है
एडवर्ड का निधन 2019 में हुआ था। उस समय जिन्हें विरासत में रिटायरमेंट अकाउंट मिलते थे, वे जीवन भर न्यूनतम रकम निकालते रह सकते थे, जिससे अकाउंट का बैलेंस दशकों तक बिना टैक्स दिए बढ़ता रहता था। 2020 या उसके बाद विरासत पाने वालों के लिए (जीवनसाथी को छोड़कर), टैक्स कानून ने इस लंबी अवधि की सुविधा को खत्म कर दिया।अगर 1986 से 2014 के बीच जन्मे पोते-पोतियों को लाभार्थी माना जाता तो उन्हें दशकों तक कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज) का फायदा मिलता। अगर परिवार केस हार जाता है तो अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, आधी रकम वैलेरी की संपत्ति में और आधी एडवर्ड के ट्रस्ट में चली जाएगी। पोते-पोतियों को पैसे तो मिल जाएंगे लेकिन वे उन कीमती टैक्स फायदों को खो देंगे।