अचानक खो गया था पौधा
ऐसा मान लिया गया था कि यह पौधा समय के साथ खो गया। यह केवल एक सदी पुराने ऐतिहासिक संग्रहों में ही मौजूद था, जब तक कि पिछले साल मसुंगी के चूना पत्थर के जंगलों में घोंघे के सर्वेक्षण अध्ययन के दौरान इसे फिर से नहीं खोजा गया। शोधकर्ताओं ने नीले-बैंगनी रंग के छोटे फूल की तस्वीरें लीं, जिससे यह 130 से अधिक वर्षों में एक्सकम लोहेरी का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड बन गया।शोधकर्ताओं ने उस समय कहा था कि इसके सीमित फैलाव को देखते हुए यह माना जाता है कि यह प्रजाति बहुत दुर्लभ है और शायद अभी खतरे में है। इस अहम खोज के एक साल बाद अब मसुंगी के डिस्कवरी ट्रेल के किनारे और भी एक्सकम लोहेरी के पौधे मिले हैं। इससे एक्सपर्ट को उम्मीद जगी है कि खोई हुई प्रजाति फिर से फल-फूल सकती है।
एक्सकम लोहेरी एक ऐसी प्रजाति है, जो खो गई थी लेकिन करीब सवा सौ साल बाद फिर मिली है और फूल भी खिल रहे हैं। खास बात ये है कि यह अपने पोषण के लिए फोटोसिंथेसिस यानी प्रकाश-संश्लेषण के बजाय मिट्टी में मौजूद फंगस पर निर्भर करता है।
