टोक्यो: जापान धान की खेती से दोहरा लाभ कमा रहा है। धान के बचे वेस्ट और बिना इस्तेमाल वाले बेकार चावल को जापानी कॉस्मेटिक्स और रोजमर्रा के घरेलू सामान बनाने के लिए ऑर्गेनिक इथेनॉल में बदल रहे हैं। फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली जापानी कंपनी फर्मेंटेशन ने एक ऐसा प्रोसेस बनाया है, जो चावल को फर्मेंट और डिस्टिल करके इथेनॉल बनाता है। साथ ही प्रोडक्शन से बचे हुए मटीरियल का भी इस्तेमाल इसमें करता है।जापानी एक्सपर्ट का ये तरीका खेती को ब्यूटी और घरेलू सामानों से जोड़ता है, जिससे एक नजरअंदाज की गई चीज काम में आ रही है। यह पारंपरिक इंडस्ट्रियल चीजों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय रिन्यूएबल मटीरियल से प्रोडक्ट बनाने की बड़ी कोशिश को दिखाता है। इस वेस्ट से घरेलू सामान और ब्यूटी प्रोडेक्ट बनाए जा रहे हैं।कैसे होता है प्रोसेस
सवाल है कि जापान चावल के कचरे को कॉस्मेटिक्स के लिए ऑर्गेनिक इथेनॉल में कैसे बदल रहा है। दरअसल इसके लिए फर्मेंटेशन ने ओशु इवाते में सिस्टम बनाया है। यहां चावल को फर्मेंट और डिस्टिल करके इथेनॉल बनाया जाता है। यह आइडिया चावल किसानों और लोकल सरकार के प्रोजेक्ट से आया, जिसमें इथेनॉल बनाने के लिए बिना इस्तेमाल वाले खेतों के चावल का इस्तेमाल करने पर रिसर्च की गई।इस प्रोजेक्ट ने आखिरकार कंपनी बनाने की प्रेरणा दी। इस प्रोसेस में फर्मेंटेशन और उसके बाद डिस्टिलेशन का इस्तेमाल होता है, जिससे चावल एक काम का अल्कोहल बन जाता है और रिसोर्स बेकार नहीं जाता। फर्मेंटेशन का कहना है कि उसके इथेनॉल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स और खुशबूदार प्रोडक्ट के लिए रॉ मटीरियल के तौर पर किया जा सकता है।कैसे होता है प्रोसेस
इथेनॉल पहले से ही उन प्रोडक्ट में एक जाना-पहचाना इंग्रीडिएंट है, जिनका इस्तेमाल लोग रोज करते हैं। फर्क इस बात का है कि मटीरियल कहां से आता है और इसे कैसे बनाया जाता है। बेकार खेती वाले मटीरियल को कचरा मानने के बजाय फर्मेंटेशन ने इसे एक और मकसद देने के लिए एक प्रोसेस बनाया है। चावल से बना मटीरियल इथेनॉल के अलावा भी काम का है। इथेनॉल अलग होने के बाद प्रोसेस खत्म नहीं होता।
फर्मेंटेशन का कहना है कि डिस्टिलेशन के बाद बचे मटीरियल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसका कुछ हिस्सा पोल्ट्री और पशुपालक किसानों को चारे के तौर पर होता है। इससे प्रोडक्शन फैसिलिटी और आस-पास के खेतों के बीच एक कड़ी बनती है, ना कि बचा हुआ मटीरियल कचरे में जाता है। कंपनी की ओशु लैब में फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन से चावल का इथेनॉल और 'चावल मोरोमी' नाम का फर्मेंटेड मैश बनता है।जानवरों के चारे में इस्तेमाल
मोरोमी को जानवरों के चारे के तौर पर बेचा जा सकता है या ऑर्गेनिक ब्यूटी प्रोडक्ट में इस्तेमाल के लिए और रिफाइन किया जा सकता है। लोकल खेतों को सप्लाई किया गया मटीरियल पशुओं के काम आता है जबकि उन खेतों से मिलने वाली खाद फर्मेंटेशन के खेतों में फर्टिलाइजर के तौर पर वापस आ सकती है।यह कनेक्शन कंपनी के तरीके का मुख्य हिस्सा है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, रोजमर्रा के उत्पादों में चावल से बना इथेनॉल शामिल हो रहा है। चावल से प्राप्त इथेनॉल अब कच्चे माल के चरण से आगे बढ़कर उत्पादों में इस्तेमाल किया जा रहा है।इन उत्पादों में इस्तेमाल
- चावल से बने इथेनॉल और आसवन अवशेषों का इस्तेमाल प्राकृतिक कॉस्मेटिक, स्किनकेयर और खूशबू प्रोडक्ट में होता है।
- चावल का इथेनॉल रूम स्प्रे और हैंड सैनिटाइजर जैसे रोज़मर्रा के उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी घटक है।
- चावल के मोरोमी (किण्वित चावल का मिश्रण) को ऑर्गेनिक ब्यूटी उत्पादों, जैसे कि फेशियल सोप में शामिल किया गया है।
- इस तरीके से चावल को भोजन या कृषि सामग्री के रूप में उसकी मूल भूमिका से हटकर एक नया जीवन मिलता है।
- ऑर्गेनिक इथेनॉल को सर्टिफाइड ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक्स के तौर पर बेचने से पहले सर्टिफिकेशन की जरूरत होती है।