
पुलिस के अनुसार फेसबुक, वॉट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय कुछ असामाजिक समूह धार्मिक और जातिगत भावनाएं भड़काने वाले संदेश, फोटो और वीडियो प्रसारित कर रहे हैं। इन गतिविधियों से दो समुदायों के बीच वैमनस्यता बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई गई है।
कमिश्नर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अक्सर मूल पोस्ट से ज्यादा उसके कमेंट और क्रॉस-कमेंट माहौल बिगाड़ते हैं। बिना जिम्मेदारी के किए गए द्वेषपूर्ण और अश्लील कमेंट समाज में तनाव पैदा कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया गतिविधियों पर व्यापक नियंत्रण लागू किया गया है।
क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित
साइबर कैफे संचालकों के लिए भी सख्ती
आदेश में साइबर कैफे संचालकों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को इंटरनेट उपयोग की अनुमति नहीं होगी। हर उपयोगकर्ता का नाम, पता, मोबाइल नंबर और पहचान विवरण रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही, वेब कैमरा से फोटो रिकॉर्ड रखना भी जरूरी किया गया है।
पुलिस ने साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दंडनीय अपराध होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश एकपक्षीय रूप से जारी किया गया है। हालांकि, इससे प्रभावित व्यक्ति धारा 163 के तहत पुलिस आयुक्त के न्यायालय में अपील कर सकता है।