
भोपाल। राजधानी भोपाल में दूषित पेयजल और जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंच गया है। एनजीटी ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
यह टीम भोपाल के अलग-अलग इलाकों में पानी की गुणवत्ता की जांच करेगी और सुधारात्मक सुझावों के साथ रिपोर्ट पेश करेगी।
याचिकाकर्ता कमल कुमार राठी ने एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में दायर आवेदन में आरोप लगाया कि शहर में पानी की जांच प्रशिक्षित वैज्ञानिकों की बजाय अस्थायी और अकुशल कर्मचारियों से कराई जा रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।याचिका में यह भी कहा गया कि कई इलाकों में जल समस्या का समाधान करने के बजाय नगर निगम ने पानी की सप्लाई ही बंद कर दी, जिसके चलते हजारों लोग टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भोपाल के भूजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। यह वही बैक्टीरिया है, जिसके कारण पहले इंदौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
आवेदन में बताया गया कि पिछले छह वर्षों में मध्यप्रदेश के शहरों में 5.45 लाख से ज्यादा लोग जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए हैं।
एनजीटी ने सीपीसीबी भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक को निर्देश दिए हैं कि संयुक्त जांच दल बनाया जाए। इसमें सीपीसीबी अधिकारी, जल विज्ञान विशेषज्ञ और वाटर लैंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
यह टीम विभिन्न इलाकों से पानी के सैंपल लेकर जांच करेगी और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।