भोपाल। मध्य प्रदेश में वाहन चालकों और नए वाहन मालिकों से परिवहन विभाग प्रति कार्ड करीब 200 रुपए की फीस तो वसूल रहा है, लेकिन बदले में उन्हें फिजिकल स्मार्ट कार्ड की जगह मोबाइल पर सिर्फ एक पीडीएफ (PDF) कॉपी भेजी जा रही है।
क्यों ठप पड़ी है प्रिंटिंग?
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट कार्ड बनाने वाली अधिकृत कंपनी 'स्मार्ट चिप प्राइवेट लिमिटेड' का कॉन्ट्रैक्ट 30 सितंबर 2024 को समाप्त हो चुका था। इसके बाद से नई एजेंसी तय करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शासन स्तर पर कछुआ गति से चल रही है।
विभागीय लेटलतीफी को देखते हुए अधिकारियों को भी इस साल जुलाई तक काम दोबारा शुरू होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
डिजिटल कॉपी से नहीं चल रहा काम
परिवहन विभाग भले ही पीडीएफ थमाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा हो, लेकिन जमीन पर आम जनता को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हर जगह मान्य नहीं: पुलिस चेकिंग, गाड़ियों के फाइनेंस (Loan), बैंकिंग और अन्य सरकारी दस्तावेजी कामों में अब भी 'फिजिकल स्मार्ट कार्ड' की मांग की जाती है, जिससे लोग परेशान हो रहे हैं।
तकनीकी दिक्कतें: ग्रामीण क्षेत्रों और कम पढ़े-लिखे या बुजुर्ग लोगों के लिए मोबाइल में पीडीएफ सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उसे दिखाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
सर्वर डाउन की दोहरी मार: पिछले कुछ दिनों से परिवहन विभाग का सर्वर भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके चलते नए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी अटक गई है और लोगों को आरटीओ के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
पिछले 20 महीनों से लोग अपने असली कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विभाग के पास फिलहाल इसका कोई ठोस समाधान नहीं है।
विभाग का दावा: "टेंडर होते ही पहले पुराने कार्ड देंगे"
इस पूरे मामले में परिवहन विभाग का कहना है कि जैसे ही नई एजेंसी का टेंडर फाइनल होगा, सबसे पहले उन आवेदकों के स्मार्ट कार्ड प्रिंट करके उनके पते पर भेजे जाएंगे, जो पिछले 20 महीने से फीस जमा करके लाइन में लगे हैं।