बता दें कि दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रदेश के 16 नगरीय निकायों की बसों का संचालन शहर से 25 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्रों तक शुरू किया गया था, लेकिन इसका गजट नोटिफिकेशन नहीं होने से परिवहन विभाग ने नगरीय बसों के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन पर रोक लगा दी है।
बीसीएलएल के अधिकारियों का कहना है कि सीआरपीएफ कैंप के दो नंबर गेट से पहले ही निगम की सीमा समाप्त हो जाती है। यदि यहां तक भी बसों का संचालन किया जाए, तो भी दो गांव से निकलकर जाना होगा। ऐसे में आरटीओ और हाइकोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। यदि
आरटीओ विशेष प्रकरण मानते हुए सीआरपीएफ जवानों के लिए चाहे तो उक्त क्षेत्र के परमिट में छूट देते हुए परिवहन सुविधा बहाल हो सकती है।
सिटी बस सेवा बंद होने से जवानों ने जताया दुख
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के बंगरसिया कैंप तक नगरसेवा बसों का आवागमन बंद होने पर सीआरपीएफ जवानों ने निराशा जताई है। उनका कहना है कि 250 एकड़ में फैले इस कैंपस में पांच हजार से अधिक लोग रहते हैं, लेकिन नगर निगम व आरटीओ के अधिकारी हमारी मदद नहीं कर रहे। जबकि हम लोग देश की सुरक्षा में अपनी जान गंवा देते हैं। परिवार से दूर रहना पड़ता है लेकिन यदि कोई परेशानी हो तो शहर और अस्पताल जाने के लिए परिवहन सेवा भी नहीं मिल रही।
निजी ट्रैवल्स और आटो का किराया बढ़ा
सीआरपीएफ कैंप में रहने वाले परिवारों ने बताया कि जब से नगर निगम की बसों का परिवहन शहर से बाहर बंद हुआ। निजी ट्रैवल्स और आटो वालों ने भी किराया बढ़ा दिया। जहां पहले बंगरसिया से एमपी नगर तक आटो का किराया 200 रुपये था, अब इसके 300 से 350 वसूले जा रहे हैं। वहीं निजी ट्रैवल्स वालों ने भी 20 की जगह 30 रुपये किराया कर दिया है।
सीआरपीएफ कैंप में रहने वाले अधिकतर जवानों की ड्यूटी इस समय चुनाव में लगी है। इनके स्वजन को अस्पताल, स्कूल, कालेज, कोचिंग व खरीदारी के लिए शहर जाना पड़ता है, लेकिन परिवहन बंद हो गया।
- सुरेश चंद्र मालवीय, लाइजनिंग अधिकारी, सीआरपीएफ कैंप
नगरीय बसों का संचालन 11 मील तक किया जा रहा है, क्योंकि सीआरपीएफ कैंप तक जाने के लिए दो गांव की सीमाओं को पार करना होता है। यदि आरटीओ छूट दे, तो हम परिवहन शुरू कर सकते हैं।
- संजय सोनी, जनसंपर्क अधिकारी, बीसीएलएल