अमित शाह की पहल पर सरदार सरोवर परियोजना विवाद सुलझा; एमपी, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में हुआ 'वन-टाइम सेटलमेंट'

Updated on 08-07-2026 01:13 PM

भोपाल। नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों- महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच दशकों से चले आ रहे लंबित भुगतान का मंगलवार को रास्ता निकल आया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर समझौता हो गया।

इस पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

लागत साझाकरण के मुद्दे पर समझौता

समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को लेकर है। इसमें लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस मौके पर कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से नर्मदा अवार्ड के लंबित भुगतान का विवाद चल रहा था, जिसका आज समाधान निकल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं।
अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ यह हुआ है कि हम में एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है, राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं। इस परियोजना से विशेषकर मध्य प्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान को बहुत लाभ हुआ।
बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची। राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, पर जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है।

एक-एक करके सुलझाए जा रहे हैं विवाद

शाह ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के नेतृत्व में देश में चल रहे जल विवाद या जल वितरण से जुड़े विवाद एक-एक कर सुलझाए जा रहे हैं। पिछले दिनों हरियाणा और राजस्थान के बीच का जल विवाद सुलझाया गया। चाहे किशाऊ बांध परियोजना का मुद्दा हो या राजस्थान, हरियाणा के बीच जल विवाद हो या आज का यह समझौता, ये सभी सहकारी संघवाद के उदाहरण हैं।
चाहे गुजरात हो, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा या महाराष्ट्र, पानी देश के लोगों, खासकर किसानों के ही काम आता है। पानी का उपयोग चाहे देश के किसी भी हिस्से में हो उससे लाभान्वित होने वाला एक भारतीय ही होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी विवाद से होने वाले राष्ट्रीय नुकसानको ध्यान में रख कर उसे सुलझाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका लाभ अपने राज्य को भी मिलता है।


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