'S-400 डिफेंस सिस्टम हमारी इजाजत के बिना किसी को नहीं दे सकते', रूसी विदेश मंत्री ने तुर्की को याद दिलाया कॉन्ट्रैक्ट
Updated on
27-09-2026 11:35 AM
मॉस्को/अंकारा: रूस के विदेश मंत्री सर्गियो लावरोव ने कहा है कि तुर्की एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम बिना हमारी इजाजत के देश की सीमा से बाहर नहीं ले जा सकता। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि तुर्की हमारी शर्तों में बंधा हुआ है और वो इस बात को जानता है। लावरोव ने कहा 'हमारे तुर्की दोस्त अच्छी तरह जानते हैं कि S-400 सिस्टम एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट के तहत दिए गए थे जिसमें एंड-यूजर सर्टिफिके का पूरा सम्मान किया जाता है।' उन्होंने आगे कहा 'वे अच्छी तरह जानते हैं कि अगर वे कभी इन सिस्टम को अपनी सीमाओं के बाहर कहीं ले जाना चाहें तो वे हमारी आधिकारिक मंजूरी के बिना ऐसा नहीं कर सकते।'रूस की मंजूरी के बिना एस-400 का ट्रांसफर नामुमकिन!
रूस की तरफ से पहली बार तुर्की को दो टूक शब्दों में समझा दिया गया है कि वो अपनी मर्जी से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को किसी और देश को नहीं बेच सकता है। दरअसल तुर्की अमेरिका से F-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के लिए छटपटा रहा है। लेकिन रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम होने की वजह से अमेरिका ने उसे एफ-35 बेचने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने तुर्की के सामने एक विकल्प रखा है कि अगर वो एस-400 को देश से हटा देता है तो एफ-35 बेचने के बारे में सोचा जा सकता है।क्या है S-400 डील का 'एंड-यूजर सर्टिफिकेट' नियम?
- अंतरराष्ट्रीय हथियार व्यापार में 'एंड-यूजर सर्टिफिकेट' (EUC) एक बेहद अहम कानूनी दस्तावेज होता है।
- जब भी कोई देश किसी दूसरे देश को फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम या सैन्य उपकरण बेचता है तो खरीदार देश को यह सर्टिफिकेट साइन करना होता है। इसके तहत खरीदार देश यह लिखित गारंटी देता है कि वह उन हथियारों का 'अंतिम उपयोगकर्ता' खुद है।
- इस एग्रीमेंट की सबसे बड़ी और सख्त शर्त यह होती है कि खरीदार देश मूल विक्रेता की अनुमति के बिना उन हथियारों को किसी तीसरे देश को ना तो बेच सकता है, ना गिफ्ट कर सकता है और ना ही ट्रांसफर कर सकता है।
- रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तुर्की को 'एंड-यूजर सर्टिफिकेट' याद दिलाया है जो एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को कभी UAE तो कभी पाकिस्तान तो कभी सऊदी को बेचने की कोशिश करता है।
F-35 खरीदने की कोशिश कर रहे तुर्की के रूस ने कैसे बांधे हाथ?
- रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तुर्की को EUC नियम इसलिए याद दिलाए हैं क्योंकि ट्रंप ने दो महीने पहले जब अंकारा की यात्रा की थी तो उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति को एफ-35 खरीदने की इजाजत शर्तों के साथ दी थी। शर्त के मुताबिक अगर तुर्की एस-400 से पीछा छुड़ा लेता है तो अमेरिका उसे एफ-35 प्रोग्राम में शामिल कर लेगा।
- तुर्की ने 2019 में रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था जिसके बाद अमेरिका ने उसे एफ-35 फाइटर प्रोग्राम से बाहर कर दिया था। इसके अलावा अमेरिका ने CAATSA नियम के तहत तुर्की पर कुछ प्रतिबंध भी लगा दिए थे।
- तुर्की के सामने अब दिक्कत ये है कि 'एंड-यूजर सर्टिफिकेट' के नियम का अगर वो तोड़ता है तो यह अंतरराष्ट्रीय हथियार संधियों का बड़ा उल्लंघन माना जाएगा। रूस के साथ उसके संबंध खराब हो जाएंगे।
तुर्की पर क्यों उठ रहे हैं S-400 ट्रांसफर के सवाल?
अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने कई बार तुर्की पर प्रेशर बनाया है कि वो एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम यूक्रेन को सौंप दे जिसका रूस से युद्ध चल रहा है। इसके अलावा तुर्की पर पश्चिमी देशों ने इस बात को लेकर भी प्रेशर बनाया है कि अगर वो यूक्रेन को एस-400 नहीं देना चाहता तो वो इसे किसी पश्चिमी देश को सौंप दे। ऐसा करने से पश्चिमी देश एस-400 के सीक्रेट जान जाएंगे। रूस S-400 और जमीन से हवा में मार करने वाले अन्य एयर डिफेंस सिस्टम पर बहुत ज्यादा निर्भर है इसीलिए माना जा रहा है कि रूसी विदेश मंत्री ने एक बार फिर से तुर्की को कॉन्ट्रैक्ट की याद दिला दी है ताकि वो विश्वासघात ना करे।