भोपाल/चन्द्र मोहन दुबे।
कलम को खरीदने वाले,कलम को प्रलोभन देने वाले शायद ये भूल जाते है जो असली कलमकार होता है वह इन सब दुर्गुणों से दूर रहता।राजधानी के कुछ दागदार दलाल टाइप के लोगों को पत्रकार की श्रेणी में लाकर राजनेता ये समझते कि इनको खुश कर लो तो पूरी मीडिया मुठ्ठी में हो जाएगी।कुछ ऐसे ही अंदाज में एक यात्रा की चर्चा सुर्खियों में है।दरअसल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भोपाल से खजुराहो की यात्रा पर कुछ लोगों को ले गए जमकर खातिरदारी की इस डेलिगेशन में कुछ तो ऐसे भी शामिल है जो सरकार को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते अब सवाल ये उठ रहा क्या प्रदेश अध्यक्ष के ही इशारे पर सुर्खियां बनती है या महज एक संयोग है।जिस मुक्ता पाठक का मामला मन्त्री राज्यवर्धन दात्तीगांव से जुड़ा पाया गया उसको भी खजुराहो की सैर कराना इस सन्देह को पुख्ता करने काफी नहीं है।
बहरहाल अब तो चर्चा का विषय यह है कि प्रदेश में बदलाव की आहट को देखकर शर्मा जी ने उन लोगों को एक प्रकार की फेयरवेल पार्टी दी है।जिस तरह बेलगाम संघठन हुआ प्रदेश में ये अपने आप मे वी डी शर्मा का असफल होने जाहिर करता है।अब जनचर्चा का विषय बना है आखिर राजसी ठाठबाट वाली यात्रा में जो खर्च हुआ वो किस मद में जुड़ेगा ये तो बक्त के साथ पता चल ही जायेगा।पर उमा भारती की एक बात शायद भूल गए वी डी शर्मा कि पत्रकार और सुनार किसी के नहीं होते।अब देखना यात्रा में शामिल कितने वफादार साबित होंगे कितने गद्दार ये तो भविष्य में पता चलेगा पर यह परिपाटी अटल आडवाणी की भाजपा से विपरीत चल पड़ी इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने जरूर आएंगे।