एमपी में होगा बड़ा प्रशासनिक फेरबदल:डॉ. राजौरा का मुख्य सचिव बनना लगभग तय, डीजीपी के लिए दो नाम

Updated on 17-06-2024 01:15 PM

पिछले दिनों मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव के तौर पर डॉ. राजेश राजौरा की नियुक्ति के बाद ये लगभग तय हो गया है कि वे ही मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव होंगे। इसी के साथ प्रदेश को नया डीजीपी भी मिल सकता है।

मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना का दो साल का कार्यकाल 2 मार्च 2024 को पूरा हो चुका है। वे नवंबर में रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह अजय शर्मा (डीजी, ईओडब्ल्यू) और अरविंद कुमार (डीजी, होमगार्ड) में से किसी एक को ये पद मिल सकता है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव से निपटने के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जल्द ही नए सिरे से प्रशासनिक जमावट करने वाले हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने अपने कार्यालय से कर दी है। अब मंत्रालय और मैदानी स्तर पर नए सिरे से अफसरों की पोस्टिंग होगी।

इसमें छह माह के कामकाज को आधार बनाया गया है। ऐसे में प्रदेश के 6 जिलों के कलेक्टर और एसपी भी बदले जाएंगे। इसके अलावा दो संभागीय आयुक्त और चार संभागों के आईजी पद पर नई पोस्टिंग हो सकती है।

मुख्यमंत्री की मुख्य सचिव वीरा राणा से ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से संकेत मिलते ही सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी शुरू कर दी है। 

सीएस पद के लिए डॉ. राजौरा पहली पसंद क्यों?

मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि डा. राजौरा को प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाना लगभग तय है। इसलिए उन्हें अगले दो महीने मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ किया गया है, ताकि वे सरकार की प्राथमिकताओं से जुड़े फैसलों को लेकर सभी विभागों से समन्वय बना सकें।

बता दें कि जब मुख्य सचिव के रिटायरमेंट से करीब 30 दिन पहले नए मुख्य सचिव को मंत्रालय में ओएसडी बनाया जाता रहा है। सूत्र ये भी कहते हैं कि छह महीने में डॉ. राजौरा का सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ प्रशासनिक तालमेल बेहतर बना है।

मुख्यमंत्री ने जब अपर मुख्य सचिवों के बीच संभागों का बंटवारा किया था, तब डॉ. राजौरा को उज्जैन संभाग की जिम्मेदारी सौंपी थी। गृह विभाग में रहते हुए उन्होंने सरकार की नीतियों को बेहतर तरीके से लागू किया। यही वजह है कि उन्हें अब मुख्यमंत्री कार्यालय का जिम्मा भी सौंपा गया है।

राजौरा सीएस बने तो 5 अफसर होंगे सुपरसीड

डॉ. राजौरा मुख्य सचिव बने तो उनसे सीनियर पांच अफसरों को सुपरसीड किया जाएगा। इनमें से दो 1989 बैच के अनुराग जैन और आशीष उपाध्याय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ हैं। जबकि इनसे एक बैच सीनियर यानी 1988 बैच के संजय बंदोपाध्याय इसी साल अगस्त में रिटायर हो जाएंगे।

उन्हीं की बैचमेट और मौजूदा मुख्य सचिव वीरा राणा के छह माह की एक्सटेंशन अवधि भी सितंबर में पूरी हो रही है। लेकिन 1989 बैच के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, जेएन कंसोटिया और प्रशासन अकादमी के डीजी विनोद कुमार सुपरसीड होंगे।

6 अफसरों को सुपरसीड कर CS बने थे बैंस

मार्च 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद जैसे ही शिवराज सिंह चौहान सीएम बने तब तत्कालीन मुख्य सचिव एम.गोपाल रेड्‌डी को हटाकर इकबाल सिंह बैंस को चीफ सेक्रेटरी बना दिया। बैंस को मुख्य सचिव बनाने के लिए 1984 बैच के अधिकारी एपी श्रीवास्तव और पीसी मीना, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ जयदीप गोविंद, राधेश्याम जुलानिया, दीपक खांडेकर और 1985 बैच के अफसर प्रभांशु कमल को सुपर सीड किया गया था।

इन विभागों में भी हो सकता है फेरबदल, जानिए वजह...

नर्सिंग कॉलेज घोटाले पर गंभीर सरकार

मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से नर्सिंग घोटाले की परतें खुल रही है, उसको लेकर सरकार गंभीर हो गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्वास्थ विभाग में पदस्थ अफसरों की पूरी कुंडली तैयार कर ली है।

ऐसा कहा जा रहा है कि विभाग के अपर मुख्य सचिव मो. सुलेमान को किसी दूसरे विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसकी वजह यह भी है कि मो. सुलेमान इस विभाग में चार साल से पदस्थ हैं। उनके ही कार्यकाल में नर्सिंग घोटाला हुआ है। मुख्यमंत्री इस घोटाले को लेकर सख्त हैं और इससे जुड़े अफसरों पर कार्यवाही के निर्देश दे चुके हैं।

संजय शुक्ला को फिर मिल सकता है उद्योग विभाग

महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला की नई पोस्टिंग मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई है। उनके पास योजना, आर्थिक और सांख्यिकी विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी है। लेकिन अब यह दोनों विभाग अन्य अफसरों को दिया जा सकता है।

सूत्रों की माने तो शुक्ला को मुख्यमंत्री कार्यालय की जिम्मेदारी के साथ उद्योग विभाग की कमान मिल सकती है। क्योंकि यह विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री के पास ही है। शुक्ला इस विभाग में पहले रह चुके हैं।

राजन बन सकते हैं प्रमुख सचिव, सेलवेंद्रन से एक विभाग वापस होगा

मुख्य राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन को किसी विभाग का प्रमुख सचिव बनाया जा सकता है। उनके स्थान पर किसी अन्य अफसर की पोस्टिंग करने की तैयारी है। इसी तरह आईजी पंजीयन और अधीक्षक मुद्रांक एम सेलवेंद्रन के पास आयुक्त सह संचालक किसान कल्याण और कृषि विकास का अतिरिक्त प्रभार है। सेलवेंद्रन से इनमें से एक पद की जिम्मेदारी वापस ली जा सकती है।

नया राज्य निर्वाचन आयुक्त कौन बन सकता है?

राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह का कार्यकाल 30 जून को पूरा हो रहा है। ऐसी संभावना है कि सरकार इस पद पर अगले माह नियुक्ति देगी। इस पद के लिए हाल ही में रिटायर हुईं आईएएस अफसर कल्पना श्रीवास्तव का नाम चर्चा में आया है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 साल का होता है। ऐसे में इसी साल रिटायर होने वाले सीनियर आईएएस अफसर भी इस्तीफा देकर इस पद पर जा सकते हैं। मुख्य सचिव वीरा राणा सितंबर और कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष संजय बंदोपाध्याय अगस्त में रिटायर हो जाएंगे जबकि राजस्व मंडल के अध्यक्ष पद से अश्विनी राय रिटायर हो चुके हैं।

दो संभाग आयुक्तों की नई पोस्टिंग

जबलपुर संभाग आयुक्त अभय कुमार वर्मा की जगह सचिव स्तर के किसी अन्य अफसर की पोस्टिंग हो सकती है। वर्मा इस पद पर अप्रैल 2023 से पदस्थ हैं। इसी तरह रीवा संभाग आयुक्त गोपाल चंद्र डांड इसी महीने रिटायर हो रहे हैं।

उनके स्थान पर मंत्रालय में पदस्थ किसी अफसर की पोस्टिंग होगी। स्वास्थ्य विभाग में अपर सचिव राकेश कुमार श्रीवास्तव भी जून माह में रिटायर हो रहे हैं। जबकि प्रबंध संचालक मत्स्य महासंघ राकेश सिंह 31 मई को रिटायर हो चुके हैं। इन पदों पर नए अफसर की पोस्टिंग की जाएगी।

चंद्रमौली की जिम्मेदारी घटाई जा सकती है

एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन के एमडी चंद्रमौली शुक्ला की जिम्मेदारी कम की जा सकती है। शुक्ला के पास एमडी, स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन तथा आयुक्त हाउसिंग बोर्ड का एडिशनल चार्ज है। सचिव विमानन का जिम्मा भी उनके पास है। इनसे भी एक पद की जिम्मेदारी वापस लेकर उसमें दूसरे अधिकारी को पदस्थ किया जा सकता है।

वंदना वैद्य फिर बन सकती हैं कलेक्टर

मार्च में लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले वंदना वेद्य को शहडोल कलेक्टर पद से हटा कर अपर आयुक्त आदिवासी विकास बनाया गया था। इसके साथ ही एमडी, अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम, संचालक आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं, एमडी- अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम तथा प्रबंध संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। लेकिन अब उन्हें फिर से कलेक्टर बनाया जा सकता है।

मनोज पुष्प के पास भी हैं दो बड़े काम

मनोज पुष्प अपर सचिव को संचालक पंचायत राज के अलावा सीईओ मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। पुष्प से एक पद की जिम्मेदारी लेकर किसी दूसरे अफसर को सौंपी जा सकती है।

शिवराज सरकार में लंबे समय तक सीईओ आजीविका मिशन रिटायर्ड आईएफएस एमएल बेलवाल रहे हैं जो विवादों के चलते इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बाद यह पद प्रभार में चल रहा है।



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