मध्‍य प्रदेश में अब भी एक करोड़ से अधिक निरक्षर, लक्ष्य को पाने में प‍िछड़े हम

Updated on 08-09-2023 01:12 PM

 भोपाल। शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से काम करने के दावे के बीच प्रदेश में अब भी एक करोड़ 17 लाख नागरिक निरक्षर हैं। पिछले एक दशक में प्रदेश में 52 लाख लोगों को साक्षर किया गया है, लेकिन केंद्र सरकार के 2030 तक पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को पाने में प्रदेश अभी काफी पीछे है। पूर्ण साक्षरता लाने के लिए प्रदेश में करीब 14.62 लाख लोगों को हर साल साक्षर बनाने की जरूरत है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अक्षर सारथियों को तैनात कर इस पर काम शुरू कर दिया गया है।

बता दें कि 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में साक्षरता दर 69.3 प्रतिशत थी। इसमें महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत तो पुरुष साक्षरता दर 80.5 प्रतिशत थी। इस हिसाब से करीब 1.70 करोड़ लोग निरक्षर थे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 15 वर्ष से अधिक के निरक्षरों के लिए नवभारत साक्षर अभियान चलाया जा रहा है। देश के कम साक्षरता वाले जिले में तीन मप्र के मप्र के जिलों में साक्षरता की बात की जाए तो देश के सबसे कम साक्षरता वाले चार जिलों में तीन मप्र के हैं। सबसे कम साक्षरता वाले जिलों में पहला नंबर आलीराजपुर का आता है। इसके बाद छत्तीसगढ़ का बस्तर है। फिर मध्य प्रदेश के झाबुआ और बड़वानी हैं। प्रदेश में ढाई लाख अक्षर सारथी प्रदेश में ढाई लाख अक्षर साथी बनाए गए हैं। इसमें कालेज के विद्यार्थी, गांव की पढ़ी-लिखी महिलाएं, स्कूल के बच्चे शामिल हैं। इसमें चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के 24 हजार विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता अभियान चलाने के लिए प्रोजेक्ट वर्क दिया गया है। इसके लिए विद्यार्थियों को 100 अंक मिलेंगे।

इन्हें कहेंगे असाक्षर

साक्षरता अभियान के राज्य समन्वयक राकेश दुबे ने बताया कि 15 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे लोग, जिनके पास किसी भी कक्षा की अंकसूची नहीं है और भले ही उन्हें पढ़ना-लिखना आता हो, फिर भी वे असाक्षर की श्रेणी में आएंगे। विभाग उन्हें परीक्षा दिलाकर साक्षर बनाएगा।साक्षरता परीक्षा में प्रदेश के आठ लाख लोग पास विभाग के एक आंकड़े के अनुसार इस साल देशभर से करीब 22 लाख लोग राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) की साक्षरता परीक्षा में शामिल हुए थे, जिसमें नौ लाख 88 हजार लोग मप्र के हैं। हालांकि इनका परिणाम अभी नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि करीब सात लाख 90 हजार लोग उत्तीर्ण हुए हैं।

इनका कहना है

15 वर्ष से अधिक उम्र के करीब नौ लाख असाक्षरों को 2030 तक साक्षर करने के लिए सभी जिलों में नवभारत साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है। इसमें ढाई लाख अक्षर सारथी बनाए गए हैं। खासतौर पर आदिवासी जिलों में अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हम तय समय में लक्ष्य पा लेंगे। - धनराजू एस, संचालक,राज्य शिक्षा केंद्र-


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