
अप्रैल से सितंबर 2025 तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया गया है। प्रदेश का हर नागरिक औसतन 54,375 रुपये के कर्ज में है लेकिन इसका लाभ उसे नहीं मिल रहा है। अधोसंरचना विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के नाम पर लिए जा रहे कर्ज से कोई ठोस काम होता नजर नहीं आ रहा है।
आर्थिक गतिविधियां बढ़ती तो रोजगार के अवसर मिलते लेकिन 30 लाख से अधिक बेरोजगार हैं। अधोसंरचना विकास ऐसा ही कि नई सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। प्रदेश की वित्तीय स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि सरकार को ब्याज का भुगतान करने के लिए ही कर्ज लेना पड़ रहा है। कर्ज पर वार्षिक ब्याज भुगतान लगभग 29,700 करोड़ रुपये है।