
लोकसभा चुनाव के चलते जनता के सामने सरकार को कामकाज का अच्छा प्रदर्शन करना होगा। मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने की संभावना है। 10 दिसंबर के आसपास प्रदेश में सरकार बनने की संभावना है।
इस तरह देखा जाए तो उसे लगभग ढाई माह ही कामकाज दिखाने के लिए मिलेंगे। नियमित कार्यों के अलावा सरकार को यह दिखाना होगा कि घोषणा पत्र में उसने जो वादे जनता से किए हैं उन्हें पूरा करने की दिशा में क्या और किस गति से कदम बढ़ाया है।
भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों ही दलों ने बड़े वर्ग को लुभाने वाली कई घोषणाएं की हैं, जिन्हें प्रारंभ करने को लेकर स्वाभाविक दबाव रहेगा। सत्ता में आने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने जनता से भारी-भरकम वादे किए हैं। कांग्रेस ने लोक लुभावन कई घोषणाएं की हैं।
100 यूनिट बिजली बिल माफ और 200 यूनिट तक आधा, नारी सम्मान योजना के अंतर्गत महिलाओं को हर माह डेढ़ हजार रुपये, पांच सौ रुपये में गैस सिलेंडर सहित 11 तरह की गारंटी देने की बात कही है। अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस ने वादा किया है कि सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में इन पर मुहर लग जाएगी।
वहीं, भाजपा ने लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को हर माह मिलने वाले 1,250 रुपये को धीरे-धीरे बढ़ाकर तीन हजार रुपये तक करने, लाड़ली बहनों को 450 रुपये में घरेलू गैस सिलेंडर, लाड़ली बहनों को आवास, हर लोकसभा क्षेत्र में मेडिकल कालेज की स्थापना, गेहूं और धान के उपार्जन पर बोनस देने सहित 10 बड़े वादे किए हैं।
सरकार बनते ही जनता उन घोषणाओं के पूरा होने की आस लगाएगी जिससे उसे आर्थिक मदद मिलने वाली है या उसकी जेब का खर्च कम होने वाला है। इन्हें पूरा करने के लिए बहुत ज्यादा धनराशि की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार पर पहले से ही तीन लाख 31 हजार करोड़ रुपये का ऋण है। ज्यादा कर्ज की वजह से कांग्रेस हमेशा ही भाजपा सरकार को घेरती रही है।
ऐसे में ऋण लेना भी विपक्ष के लिए मुद्दा बनेगा। इस तरह नई सरकार चुनौतियों से घिरेगी। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की घोषणाएं पूरा करने में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये और भाजपा को अपने संकल्प पूरे करने के लिए 35 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इनके लिए व्यवस्था करनी होगी।