काबुल से दिल्ली तक कांपी धरती, अफगानिस्तान के हिंदूकुश में क्‍यों आते हैं भूकंप? वजह जान लीजिए

Updated on 11-09-2024 04:56 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में 5.8 तीव्रता का भूकंप आने से दिल्ली और उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में हल्के झटके महसूस किए गए।इस्लामाबाद, लाहौर, मुल्तान, फैसलाबाद, मियांवाली, भक्कर, कमालिया, खानेवाल, भलवाल, चिनिओत, हाफिजाबाद, टोबा टेक सिंह शहरों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र पाकिस्तानी पंजाब के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में डेरा गाजी खान क्षेत्र के पास 10 किलोमीटर की गहराई पर था। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी भूकंप को महसूस किया गया। भूकंप से अफगानिस्तान भी अछूता नहीं रहा, हालांकि उनका असर काफी कम था। इस भूकंप से अभी तक किसी के हताहत होने या जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। यह पिछले दो हफ्तों में दूसरी बार है, जब दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में भूकंप आया है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे क्षेत्र में भूकंप इतनी जल्दी-जल्दी कैसे आ रहे हैं।

हिंदूकुश में भूकंप आने का कारण क्या है


हिंदूकुश क्षेत्र में भूकंप आने के कई कारण है, इसमें सबसे अहम इसकी भौगोलिक स्थिति है। हिंदूकुश क्षेत्र में आए भूकंप को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत तक महसूस किया जाता है। हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं, जिस वजह से यह भूकंपीय गतिविधियों के प्रति अति संवेदनशील क्षेत्र बन जाता है। हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला, इंडियन, यूरेशियन, और अरब टेक्टोनिक प्लेटों के बीच की सीमा पर स्थित है। इन प्लेटों के टकराने से भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं और भूकंप आते हैं।

तेजी से आगे बढ़ रही इंडियन प्लेट


वैज्ञानिकों के अनुसार, इंडियन प्लेट हर साल 15-20 मिलीमीटर की रफ्तार से तिब्बत की ओर बढ़ रही है। इस दौरान जब बड़ी जमीन का टुकड़ा पृथ्वी के काफी नीचे किसी दूसरी प्लेट पर आगे बढ़ने का दबाव बनाता है, तो उससे ऊर्जा रिलीज होती है। जब यह ऊर्जा बाहर निकलती है, तो इससे छोटे-छोटे भूकंप आते हैं। हाल के अध्ययनों के मुताबिक, पृथ्वी के तापमान में बढ़ोतरी के कारण भी भूकंप आ रहे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने और समुद्र के जल स्तर में बढ़ोत्तरी से पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों पर दबाव का संतुलन बिगड़ा हुआ है।

हिंदूकुश क्षेत्र में तेज भूकंप आने की आशंका


हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला और पामीर नॉट भूगर्भीय रूप से जटिल क्षेत्र हैं जहाँ टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव और एक दूसरे को धकेलने के परिणामस्वरूप पृथ्वी की पपड़ी में तह और फॉल्ट बनते हैं। इससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जो भूकंप के रूप में महसूस होती है। पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद ये प्लेटें तेजी से उत्तर की ओर बढ़ रही हैं, हालांकि इस दौरान तिब्बती प्लेट को आगे बढ़ने की जगह नहीं मिल रही है। इससे शक्तिशाली भूकंप के आने का खतरा भी लगातार बना हुआ है।

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