
न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डा. संदीप सोरते ने बताया कि बच्चे के माता-पिता बीएमएचआरसी उसे लेकर आए थे। सीटी स्कैन और एमआरआइ जांच के बाद बच्चे का दो चरणों में आपरेशन करने का फैसला किया। पहले चरण में स्पाइनल कार्ड पर दबाव बना रही एक हड्डी को मुंह के रास्ते से सर्जरी कर काटा गया। इस पूरे आपरेशन में करीब चार घंटे का समय लगा।
न्यूरो सर्जरी विभाग में सहायक प्रोफेसर डा. सौरभ दीक्षित ने बताया कि कुछ दिन बाद दूसरे चरण में गर्दन के पीछे की हड्डी को काटकर बाकी हड्डी को स्क्रू और राड से जोड़ा गया। इस तरह नस स्पाइनल कार्ड पर पड़ रहे दबाव को हटाया गया। इस चरण में कुल 7-8 घंटे का समय लगा। आपरेशन के बाद मरीज की फिजियोथैरेपी शुरू की गई। फिजियोथैरेपिस्ट डा. नेहल शाह ने बताया कि आपरेशन से पहले मरीज की मांसपेशियों में कोई ताकत नहीं थी, जिसके लिए उसे हाथ-पैरों के कुछ व्यायाम करवाए गए। सांस के लिए भी कसरत बताई गई। आपरेशन के बाद मांसपेशियों ने काम करना शुरू किया।
डा. सौरभ दीक्षित ने बताया कि मरीज का एक बार में आपरेशन करना मुमकिन नहीं था, क्योंकि स्पाइन कार्ड पर दबाव बनाने वाली हड्डी को एक बार आगे से काटना था और दूसरी बार पीछे से। बच्चे की उम्र कम थी, इसलिए उसे कितने समय तक बेहोश करके रखना है, इसका ध्यान रखना भी जरूरी था।
क्यों मुश्किल था आपरेशन
प्राइवेट अस्पतालों में इस सर्जरी पर चार से 4.5 लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन बीएमएचआरसी में प्रधानमंत्री जनारोग्य योजना से मरीज की निशुल्क सर्जरी की गई।
डा. मनीषा श्रीवास्तव, प्रभारी निदेशक, बीएमएचआरसी, भोपाल