दरबार में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु दीप प्रज्ज्वलित करने पहुंचीं। बाबाजी ने इस मौके पर कहा कि देवउठनी ग्यारस पर भीकम के दीप प्रज्ज्वलित करने का आध्यात्मिक महत्व है। दीप प्रज्ज्वलित करने से जीवन का अंधेरा दूर होता है। जीवन रौशन हो जाता है। बाबाजी ने कहा कि भीष्म पितामह को समर्पित यह दीप आस्था और विश्वास के प्रतीक हैं। दीप जलाने से मनोकामनां पूरी होती हैं।
तुलसी, शालिग्राम विवाह रस्म भी हुई
देवउठनी एकादशी पर दरबार में तुलसी एवं शालिग्राम विवाह की रस्म भी पूरी की गई। दरबार में कार्तिक महोत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह ब्रह्म मुहुर्त एवं शाम को कीर्तन हो रहा है। महोत्सव का समापन 27 नवंबर, कार्तिक पूर्णिमा को गुरुनानक जयंती के साथ होगा। इस दिन गुरुनानक देवजी का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।