भोपाल। शहर में कलात्मक, सांस्कृतिक, सामाजिक, खेल, धार्मिक आदि गतिविधियों का सिलसिला चलता रहता है। गुरुवार 30 नवंबर को भी शहर में ऐसी अनेक गतिविधियों का आयोजन होने जा रहा है, जिनका आप आनंद उठा सकते हैं। यहां हम कुछ ऐसे ही चुनींदा कार्यक्रमों की जानकारी पेश कर रहे हैं, जिसे पढ़कर आपको अपनी दिन की कार्ययोजना बनाने में आसानी होगी।
ब्रह्मोत्सव - रायसेन रोड के सज्जन सिंह नगर रिथत एनआरआइ संस्थान में लक्ष्मी पद्मावती वेंकटेंश बालाजी हनुमान एवं गरुण मंदिर के प्रांगण में चार दिवसीय ब्रह्मोत्सव के तहत आज दूसरे दिन सुबह नौ बजे से सुप्रभात सेवा के बाद यज्ञशाला की द्वार पूजा होगी व अग्नि प्रतिष्ठा होगी। माता लक्ष्मी का नौ कलशों से अभिषेक किया जाएगा। साथ ही ध्वजारोहणम होगा। शाम छह बजे विष्णु सहस्त्रनाम परायणम नित्य हवन, बालाजी महाराज की विवाह बारात, पालकी व पूणार्हुति आयोजित की जाएगी।
जनजातीय चित्र प्रदर्शनी - आदिवासी कला एवं संस्कृति केंद्र, जीटीबी कम्पलेक्स में जानजातीय चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पद्मश्री भूरी बाई सहित 10 आदिवासी कलाकारों की करीब दो दर्जन कृतियां प्रदर्शित हैं। कृतियों को सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक देखा जा सकता है।
कथक कार्यशाला - कटारा हिल्स स्थित चक्रधर कल्चरल सेंटर में कथक नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। संस्कार भारती विद्यापीठ के सहयोग से आयोजित यह कार्यशाला 20 दिसंबर तक चलेगी। इसमें विद्यार्थियों को चक्रधर कल्चरल सेंटर अध्यक्ष एवं कथक गुरु प्रीति तिवारी द्वारा कथक की बारीकियां बताई जा रही हैं। कार्यशाला निश्शुल्क है। समय सुबह 10 से 12 बजे तक है, जिसमें पांच से 16 साल के लगभग 75 विद्यार्थी सहभागिता कर रहे हैं।
मैजिक महेश्वरी उत्सव - मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम की ओर से मृगनयनी कबीरा एम्पोरियम, जवाहर चौक में मैजिक महेश्वर प्रदर्शनी उत्सव का आयोजन तीन दिसंबर तक किया जा रहा है। प्रदर्शनी में साड़ियों पर जाला हंसा बार्डर में नर्मदा के घाट के डिजाइन बुनाई के माध्यम से दर्शाए गए हैं, वहीं महेश्वर के बुनकर चंद्रकला डिजाइन की साड़ियां लेकर आए हैं। इसे सुबह 11 बजे से रात 08 बजे तक देखा जा सकता है।
माह का प्रादर्श - मानव संग्रहालय के अंतरंग भवन वीथि संकुल में नवंबर माह के प्रादर्श के रूप में इंडोनेशिया में छाया रंगमंच के सबसे पुराने और लोकप्रिय कला वेयांग कुलित : रामा व लक्ष्मण को शामिल किया है, जिसे वर्ष 1998 में संकलित किया गया था। इस प्रादर्श का संयोजन संग्रहालय एसोसिएट डा. पी. अनुराधा ने किया है। इस प्रदर्शनी को सुबह 11 बजे से देखा जा सकता है।
चित्र प्रदर्शनी - मप्र जनजातीय संग्रहालय में प्रदेश के आदिवासी समुदाय के चित्रकारों की चित्र प्रदर्शनी हर माह लिखंदरा दीर्घा में लगती है। किसी एक जनजातीय चित्रकार की प्रदर्शनी सह विक्रय का संयोजन शलाका नाम से किया जाता है। इसी क्रम में इस माह भील समुदाय के चित्रकार दिलीप गणावा के चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। 43वीं शलाका चित्र प्रदर्शनी 30 नवंबर तक जारी रहेगी।