विनेश फोगाट के लेटर पर बहन-जीजा का पलटवार:कहा- आपने बहुत अच्छा लिखा, ताऊ महावीर को भूल गए

Updated on 17-08-2024 05:50 PM

पेरिस ओलिंपिक में कुश्ती के फाइनल मैच से पहले 100 ग्राम वजन ज्यादा होने पर डिस्क्वालिफाई हुईं विनेश फोगाट शनिवार को भारत लौट आईं। एक दिन पहले विनेश ने 3 पेज का लेटर शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने स्ट्रगल के बारे में बताया।

लेटर के बाद विनेश की चचेरी बहन गीता फोगाट के पति पवन सरोहा ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा, 'विनेश आपने बहुत बढ़िया लिखा है लेकिन शायद आज आप अपने ताऊ जी महावीर फोगाट को भूल गए हैं, जिन्होंने आपकी कुश्ती जीवन को शुरू किया था। भगवान आपको शुद्ध बुद्धि दे।'

वहीं गीता फोगाट ने बिना किसी का नाम लिखे सोशल मीडिया पर लिखा, 'कर्मों का फल सीधा सा है, छल का फल छल, आज नहीं तो कल।'

कौन हैं महावीर फोगाट

विनेश फोगाट चरखी दादरी जिले के बलाली गांव की रहने वाली हैं। इसी गांव से द्रोणाचार्य अवॉर्डी महावीर फोगाट रहते हैं। वह विनेश के ताऊ हैं। विनेश को कुश्ती के गुर इन्हीं ने सिखाए थे। महावीर फोगाट की बेटियां गीता और बबीता भी कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीत चुकी हैं। गीता के पति पवन सरोहा भी रेसरल हैं। वह भी कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीत चुके हैं।

अब जानिए, विनेश ने लेटर में क्या लिखा...

विनेश ने लिखा, 'जो पेरिस में हुआ अगर वो न होता तो मैं ओलिंपिक 2032 तक खेलती, क्योंकि मेरे अंदर लड़ने की भावना और कुश्ती हमेशा रहेगी। मुझे नहीं पता कि भविष्य क्या है और मेरे लिए सफर में आगे क्या होगा, लेकिन एक बात पक्की है कि मैं हमेशा उस बात के लिए लड़ती रहूंगी, जो मुझे सही लगती है।

कहने को काफी कुछ है, लेकिन शब्द कभी पर्याप्त नहीं होंगे। हो सकता है कि जब समय सही हो मैं इस पर दोबारा बात करूं।' पेरिस ओलिंपिक के दौरान विनेश 7 अगस्त को फाइनल से ठीक पहले 100 ग्राम ओवरवेट होने के कारण अयोग्य घोषित कर दी गई थीं।

मैंने रातभर वजन कम करने की कोशिश की। करीब साढ़े पांच घंटे तक कड़ी मेहनत की, लेकिन अपने वजन को अपनी वेट कैटेगरी 50 kg पर नहीं ला सकी।' उधर उनके फॉरेन कोच वॉलर अकोस ने आज खुलासा किया, 'एक समय हमें लगा कि विनेश मर जाएगी।

6 अगस्त की रात और 7 अगस्त की सुबह, हमने हार नहीं मानी। हमारी कोशिशें नहीं रुकीं। हम झुके नहीं, लेकिन घड़ी रुक गई और समय सही नहीं था। मेरा भाग्य भी साथ नहीं था। मेरी टीम, भारतीयों के लिए, मेरे परिवार के लिए, हम जिस गोल के लिए काम कर रहे थे। वो अधूरा रह गया। ये हमेशा मिसिंग रहेगा।'

7 पॉइंट्स में विनेश की बातें...

पिता का सपना पूरा किया

'जब मैं छोटी थी, तब मुझे ओलंपिक्स के बारे में जानकारी नहीं थी। मैं भी हर छोटी बच्ची की तरह लंबे बाल रखना चाहती थी। फोन को हाथ में लेकर घूमना चाहती थी। मेरे पिता एक सामान्य बस ड्राइवर हैं। वे अपनी बेटी को हवाई जहाज में उड़ते हुए देखना चाहते थे। मैंने अपने पिता का सपना पूरा कर दिया। जब भी वे मुझसे इसका जिक्र करते हैं तो मैं हंस देती हूं।'

पति सोमवीर ने हर कदम पर दिया साथ

'तमाम मुश्किलों के बावजूद मेरे परिवार ने भगवान पर भरोसा रखा। हमें यह यकीन है कि जो भगवान ने हमारे लिए सोचा होगा, वह अच्छा ही सोचा होगा। मेरी मां हमेशा कहती हैं कि भगवान कभी अच्छे लोगों के जीवन में बुरी चीजें नहीं आने देते हैं। मुझे इस बात पर तब और ज्यादा यकीन हो गया, जब मैं अपने पति सोमवीर के साथ जीवन के रास्ते पर आगे बढ़ी। सोमवीर ने मेरा हर सफर में साथ दिया है।'

मुझे पता था कि सोमवीर मेरे साथ खड़ा है

सोमवीर, जो कि मेरे पति, जीवनसाथी और जीवन भर के लिए सबसे अच्छे दोस्त हैं। यह कहना कि जब हमने किसी चुनौती का सामना किया, तो हम बराबर के भागीदार थे, गलत होगा, क्योंकि उन्होंने हर कदम पर बलिदान दिया और मेरी कठिनाइयों को उठाया, हमेशा मेरी रक्षा की। उन्होंने मेरी यात्रा को अपने सफर से ऊपर रखा और अत्यंत निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ अपना सहयोग प्रदान किया। यदि वह नहीं होता, तो मैं यहां रहने, अपनी लड़ाई जारी रखने और प्रत्येक दिन का सामना करने की कल्पना नहीं कर सकती थी। यह केवल इसलिए संभव है, क्योंकि मैं जानती हूं कि वह मेरे साथ खड़ा है, मेरे पीछे है और जरूरत पड़ने पर मेरे सामने खड़ा है और हमेशा मेरी रक्षा कर रहा है।

मां चाहती थी कि उसके सभी बच्चे खुश रहें

मेरी मां जो अपने जीवन की कठिनाइयों पर एक पूरी कहानी लिख सकती थीं, उन्होंने केवल यह सपना देखा था कि उनके सभी बच्चे एक दिन उनसे बेहतर जीवन जिएंगे। स्वतंत्र होना और उनके बच्चों का अपने पैरों पर खड़ा होना उनके लिए एक सपना था। उनकी इच्छाएं और सपने मेरे पिता से कहीं अधिक सरल थे। लेकिन मेरे पिता हमें छोड़कर चले गए और मैं बस उनके विचार और प्लेन में उड़ान भरने की यादों के साथ रही। मैं तब उनके अर्थ को लेकर असमंजस में थी, लेकिन फिर भी उस सपने को अपने पास रखा।

मां ने हक के लिए लड़ना सिखाया

मेरी मां का सपना अब और दूर हो गया था, क्योंकि मेरे पिता की मृत्यु के कुछ महीने बाद उन्हें स्टेज तीन कैंसर का पता चला था। यहां तीन बच्चों की यात्रा शुरू हुई, जो अपनी अकेली मां का समर्थन करने के लिए अपना बचपन खो देते हैं। जल्द ही मेरे लंबे बाल, मोबाइल फोन के सपने धूमिल हो गए, क्योंकि मैंने जीवन की वास्तविकता का सामना किया और अस्तित्व की दौड़ में शामिल हो गई। लेकिन संघर्ष ने मुझे काफी कुछ सिखाया। मेरी मां का संघर्ष, कभी हार ना मानने का व्यवहार और लड़ने की क्षमता, जैसी मैं आज हूं। उन्होंने मुझे उस चीज के लिए लड़ना सिखाया, जो मेरा हक है। जब मैं साहस के बारे में सोचती हूं तो उनके बारे में सोचती हूं और यही साहस है जो मुझे परिणाम के बारे में सोचे बिना हर लड़ाई लड़ने में मदद करता है।

पिछले 2 साल में मेरे साथ काफी कुछ हुआ

मेरी यात्रा ने मुझे बहुत सारे लोगों से मिलने का मौका दिया है, जिनमें से ज्यादातर अच्छे और कुछ बुरे निकले। पिछले डेढ़-दो साल में, मैट के अंदर और बाहर बहुत कुछ हुआ है। मेरी जिंदगी ने कई मोड़ लिए और ऐसा लगा जैसे उससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है, लेकिन मेरे आस-पास के जो लोग थे, उनमें ईमानदारी थी, मेरे प्रति सद्भावना थी और व्यापक समर्थन था। ये लोग और मुझ पर उनका विश्वास इतना मजबूत था कि मैं आगे बढ़ी और पिछले 2 वर्षों से इन चुनौतियों से निपट सकी।

विनेश ने सपोर्ट स्टाफ और डॉ. पारदीवाला का आभार जताया

मैट पर मेरी यात्रा के दौरान पिछले 2 साल से मेरे सपोर्ट स्टाफ ने बड़ा योगदान दिया है। डॉ. दिनशॉ पारदीवाला भारतीय खेलों में नया नाम नहीं है। मेरे लिए और मुझे लगता है कि कई अन्य भारतीय एथलीटों के लिए, वे सिर्फ एक डॉक्टर नहीं है, बल्कि भगवान द्वारा भेजे गए एक देवदूत हैं। जब चोटों का सामना करने के बाद मैंने खुद पर विश्वास करना बंद कर दिया था, तो यह उनका विश्वास, काम और मुझ पर भरोसा ही था, जिसने मुझे फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। अपने काम और भारतीय खेलों के प्रति उनका समर्पण और ईमानदारी ऐसी चीज है, जिस पर भगवान को भी संदेह नहीं होगा। मैं उनके और उनकी पूरी टीम के काम और समर्पण के लिए हमेशा आभारी हूं। उनका पेरिस में होना सभी एथलीट के लिए उपहार है।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 July 2026
नई दिल्ली: वैभव सूर्यवंशी मौजूदा समय में दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट सुपरस्टार नजर आते हैं। वे जहां जाते हैं उनके चाहने वाले पीछे-पीछे अपना कैमरा ले आते हैं। कई…
 01 July 2026
नई दिल्ली: आयरलैंड के खिलाफ हाल ही में खेली गई दो मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम को मिली 2-0 की ऐतिहासिक हार के बाद टीम के प्रदर्शन पर…
 01 July 2026
नई दिल्ली: कलिंगा स्टेडियम में आयोजित हुई 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के आखिरी दिन जेवलिन थ्रो स्पर्धा में रोहित यादव का जलवा देखने को मिला। रोहित ने 87.05…
 01 July 2026
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट जगत में इन दिनों 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर जबरदस्त हाइप है। उन्हें भारतीय टी20 टीम में शामिल तो कर लिया गया है लेकिन…
 29 June 2026
नई दिल्ली: क्रिकेट के मैदान की कुछ कहानियां रिकॉर्ड बुक से ज्यादा दिल में जगह बना लेती हैं। कुछ ऐसी ही दास्तान आयरलैंड की ओर से खेलने वाले जय मूंदड़ा…
 29 June 2026
नई दिल्ली: बेलफास्ट के मैदान पर 28 जून को भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय लिखा गया, जिसने करोड़ों भारतीय फैंस के दिलों को तोड़कर रख दिया है।…
 29 June 2026
नई दिल्ली: ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे रोमांचक टेस्ट मैच के चौथे दिन न्यूजीलैंड ने डेरिल मिचेल के शानदार और नाबाद शतक की बदौलत अपनी दूसरी पारी 228/9 के…
 29 June 2026
लंदन: आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का सफर सेमीफाइनल से पहले ही थम गया है। कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम इंडिया 12 देशों के…
 29 June 2026
नई दिल्ली: एफआईएच प्रो लीग के अपने आखिरी मुकाबले में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराया। ली वैली हॉकी…
Advt.