अयोध्या बायपास में 7871 पेड़ बचाने सड़क पर उतरेंगे लोग

Updated on 25-12-2025 12:21 PM
भोपाल, भोपाल के अयोध्या बायपास को 10 लेन में तब्दील करने के लिए 7871 पेड़ों को काटने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) रोक लगा दी गई है। अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी। इससे पहले पेड़ों को कटने से बचाने के लए गुरुवार को लोग सड़क पर उतरेंगे।

पर्यावरणविद् का कहना है कि जिन पेड़ों को एनएचएआई नगर निगम के जरिए काट रहा है, उनकी उम्र 40 से 80 साल तक है। भले ही 81 हजार पौधे रोपने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन इन पौधों को पेड़ बनने में सालों लग जाएंगे। ऐसे में एनएचएआई 10 की बजाय सिक्सलेन बनाने पर जोर दें। जिससे हरियाली नहीं उजड़ेंगी और सड़क भी चौड़ी हो जाएगी।

पर्यावरणप्रेमी पेड़ों से लिपटकर आंदोलन करेंगे पेड़ों को बचाने के लिए गुरुवार दोपहर 2 बजे कई पर्यावरणप्रेमी काकड़ा फार्म हाउस अयोध्या बायपास पर पहुंचेंगे और पेड़ों से लिपटकर उन्हें बचाने की गुहार लगाएंगे। इंफ्रास्क्ट्रचर एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि 10 लेन रोड किसी को नहीं चाहिए।

वर्तमान में चार लेन रोड है, उसे अधिक से अधिक छह लेन करना उचित है। वहां पर जितना ट्रैफिक है, उसके हिसाब से इतनी लेन की रोड की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा नेशनल हाईवे अथॉरिटी को शहर के अंदर रोड बनाने का अधिकार नहीं है, उनको शहर के बाहर की रोड पर बनाना चाहिए ।

पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने बताया कि पेड़ों को बचाने के लिए अब सड़क पर उतरेंगे। अयोध्या बायपास का इलाका काफी हरा-भरा है। ऐसे में पेड़ों को काट दिया जाता है तो हरियाली उजड़ जाएगी। इसलिए गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग एकसाथ जुटेंगे और पेड़ों को बचाने की गुहार लगाएंगे।

16 किमी लंबा 10 लेन आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 16 किमी लंबे अयोध्या बायपास को दस लेन बनाया जाना है। तीन दिन पहले गठित कमेटी के आदेश के बाद नगर निगम के माध्यम से एनएचएआई ने पेड़ कटवाने का काम शुरू किया। पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना ने यह याचिका लगाई थी। उन्होंने बताया कि जब तक एनजीटी अपने स्पष्ट आदेश जारी नहीं कर देती, तब तक पेड़ों की कटाई नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन गठित कमेटी ने आदेश जारी कर दिए। इसलिए 8 जनवरी तक पेड़ काटने पर रोक लगाई गई है।

एनजीटी में इस मामले की सुनवाई जस्टिस पुष्पा सत्यनारायणा और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। ​ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि CEC कमेटी की बैठक के मिनट्स अभी तक पेश नहीं किए गए हैं।

इसलिए अगली सुनवाई तक प्रोजेक्ट स्थल पर पेड़ों की कटाई या कटाई नहीं की जाए। ​हालांकि, एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि एनएचएआई पेड़ों को काटे बिना सड़क प्रोजेक्ट का अन्य कार्य जारी रख सकता है। दूसरी ओर, एनएचएआई का तर्क है कि सीईसी की बैठक के सारे मिनट्स एनजीटी में पेश कर दिए गए। बावजूद 8 जनवरी तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई गई है। इस संबंध में अपना पक्ष भी रखेंगे।

कांग्रेस का दो दिन तक प्रदर्शन बता दें कि सोमवार को अयोध्या बायपास पर कई पेड़ों को काटने की कार्रवाई की गई थी। इसका कांग्रेस ने विरोध किया। एनएचएआई ठेकेदार के जरिए पेड़ कटवा रहा है। मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने कार्रवाई का विरोध जताया। साथ ही इसे तुरंत रोकने की मांग की।

अगले दिन मंगलवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, रविंद्र साहू झूमरवाला समेत कई कांग्रेसियों ने मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन किया था। पर्यावरणविद उमाशंकर तिवारी ने बताया कि बायपास के दोनों ओर जो भी पेड़ काटे जा रहे हैं, उनकी उम्र 80 से 100 साल या इससे अधिक है। इनके बदले यदि नए पौधे लगाए भी जाएंगे तो उनके पेड़ बनने में सालों बीत जाएंगे।

विकास के नाम पर हरियाली का विनाश मंजूर नहीं है। एनएचएआई पेड़ों की कटाई तुरंत रोके। ताकि, हरियाली बचाई जा सके।

NHAI ने पेड़ों के बदले यह प्लान बनाया था

दस लेन सड़क बनाने के बदले कुल 7871 पेड़ कटेंगे। उनके एवज में एनएचएआई कुल 81 हजार पौधे लगाएगा।

10 हजार पौधे अयोध्या बायपास के दोनों ओर लगेंगे। इनमें छाया, फलदार एवं शेड-बेयरिंग प्रजाति के पौधे शामिल हैं। इन पौधों की 15 साल एनएचएआई देखरेख करेगा। करीब 20 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इस संबंध में केंद्रीय अधिकार समिति को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है।

नगर निगम के सहयोग से 10 हजार अतिरिक्त पौधों का रोपण किया जाएगा। नगर निगम ने NHAI को विभिन्न पार्क, रिक्त भूमि एवं सड़क किनारे की उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराई है। जहां स्थानीय, छायादार एवं उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।

झिरनिया एवं जागरियापुर क्षेत्र में जिला प्रशासन ने भूमि दी है, जो राजस्व वन की है। यहां 61 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। इस क्षेत्र को विकसित वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। जून-2026 तक सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली जाएंगी। ताकि अगले मानसून के दौरान पौधारोपण कार्य समयबद्ध रूप से किया जा सके।



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