इस्लामाबाद: शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती (28 सितंबर) के मौके पर पाकिस्तान से एक अच्छी खबर आई है। पाकिस्तानी सरकार फैसलाबाद के बंगा में भगत सिंह का स्मारक बनाने की योजना बना रही है, जहां 1907 में उनका जन्म हुआ था। फैसलाबाद जिला प्रशासन ने भगत सिंह के पुश्तैनी घर को सुधारा है। इस योजना में भगत सिंह के सम्मान में उनके गांव में स्मारक बनाना भी शामिल है। बंगा गांव महान क्रांतिकारी भगत सिंह के शुरुआती जीवन से जुड़ी एक ऐतिहासिक जगह है, जो पूरे दक्षिण एशिया से नौजवानों के लिए आकर्षण बन सकती है।पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, फैसलाबाद के डिप्टी कमिश्नर नौमान सिद्दीकी ने बताया है कि जिला प्रशासन भागत सिंह विरासत को बचाने के लिए स्मारक के बारे में सोच रहा है। इस प्रस्तावित स्मारक का मकसद भगत सिंह का इस इलाके से जुड़ाव और आजादी की लड़ाई में उनकी भूमिका को उजागर करना है। जिससे युवा उनके बारे में जान सकें।भगत सिंह फाउंडेशन ने किया स्वागत
लाहौर स्थित भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने फैसलाबाद प्रशासन की उनका स्मारक बनाने की योजना का स्वागत किया है। फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने कहा कि भगत सिंह ने आजादी की लड़ाई लड़ी और अपनी जान की कुर्बानी दी। ये हमारे लिए फख्र की बात है कि इतने महान क्रांतिकारी इसी जमीन से निकले थे।
इम्तियाज ने आगे कहा कि भगत सिंह एक साझा नायक के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए। वह भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। फैसलाबाद का प्रस्तावित स्मारक पाकिस्तान में भगत सिंह की याद में एक और जगह होगी। उनकी जन्मस्थली और उनसे जुड़ी जगहें अविभाजित पंजाब की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं।लाहौर में भगत सिंह की यादें
इससे पहले 2024 को लाहौर के पूंछ हाउस में भगत सिंह गैलरी खोली गई थी, जहां उनसे जुड़ी तस्वीरें, पत्र और दस्तावेज रखे गए हैं। लाहौर के पूंछ हाउस में ही लाहौर षड्यंत्र मामले में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव पर मुकदमा (1929-30) चलाया गया था।
लाहौर में शादमान फव्वारा चौक का नाम बदलकर भगत सिंह चौक रखने की भी लंबे समय से मांग हो रही है। यह इलाका पहले सेंट्रल जेल का हिस्सा था, जहां 23 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। चौक के नामकरण का मामला कोर्ट तक जा चुका है।