सिंधु संधि निलंबित होने से पाकिस्तान में गहराया जल संकट, 22% कम हुआ पानी, शहबाज की नई टेंशन
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13-10-2026 12:39 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने 2026-27 के आने वाले खरीफ सीजन के लिए सिंधु बेसिन में पानी की आमद में 22 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने सिस्टम में कमी पंजाब और सिंध प्रांत के लिए 22% आंकी है। हालिया खरीफ सीजन के दौरान भी पाकिस्तान में पानी आने में गिरावट दर्ज की गई। इससे पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ेगी और देश में खाद्य संकट बढ़ सकता है। यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित कर दी है।CNN-News18 ने पाकिस्तान के एक आधिकारिक बयान के हवाले से कहा है कि पंजाब और सिंध के कृषि क्षेत्र को इस साल 22 फीसदी कम पानी सिंधु बेसिन से मिल सकता है। पाकिस्तान के जल अधिकारियों को पिछले साल भी सिंचाई के बड़े संकट की आशंका थी। पाकिस्तान ने पिछले साल मई में खरीफ फसल के अहम सीजन की शुरुआत में पानी की 21% तक कमी का अनुमान लगाया था।पाकिस्तान में सिंचाई पर चिंता
पाकिस्तान के सिंचाई विभाग ने जलाशयों के घटते स्तर, नदियों के पानी की अनिश्चितता और झेलम-चिनाब सिस्टम में पानी का बहाव कम होने पर बढ़ती चिंता की बात कही है। अधिकारियों ने बार-बार झेलम-चिनाब नदी सिस्टम में पानी की कम आवक पर चिंता जताई है। इसमें चिनाब नदी में भारत की ओर से कम पानी की आपूर्ति से पैदा संकट का जिक्र है।पाकिस्तान की सिंचाई वाली खेती का बड़ा हिस्सा पंजाब और सिंध में होता है। रिकॉर्ड बताते हैं कि अधिकारी इस साल मुश्किल फसल सीजन की तैयारी कर रहे हैं और पश्चिमी नदी सिस्टम के कुछ हिस्सों में पानी का बहाव कम होने पर चिंता जता रहे हैं। सिंधु बेसिन में पानी के बहाव में किसी भी बदलाव का खाद्य सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ता है।पाकिस्तान के लिए IWT क्यों अहम
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता साल 1960 में हुआ था। इस समझौते में विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते के तहत पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलुज) भारत को मिली हैं। जबकि पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी पाकिस्तान को देने का फैसला किया गया था।
सिंधु नदी बेसिन यानी भारत से जाने वाली नदियां पाकिस्तान के लिए जीवन रेखा की तरह हैं। पाकिस्तान की बड़ी आबादी, खासतौर से पंजाब और सिंध की बिजली और पेयजल व्यवस्था और सिंचाई व्यवस्था इसी नदी प्रणाली पर टिकी हुई है। ऐसे में पाकिस्तान ने IWT को निलंबित करने का कड़ा विरोध किया है।