एक अनुमान के मुताबिक जल्द ही दुनिया की लगभग दो-तिहाई आबादी पानी की कमी की समस्या से जूझती नजर आएगी। इसी को ध्यान में रखकर विज्ञानियों ने इस शोध को आगे बढ़ाया है। इस शोध को भोपाल के कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. शंकर चाकमा ने किया है। शोध को अमेरिकन केमिकल सोसाइटी ईएसटी इंजीनियरिंग जर्नल में प्रकाशित किया जा चुका है। इस शोध में शोधार्थी विश्रांत कुमार, अभिनव चंदेल, प्राची उपाध्याय और डा. शंकर चाकमा का विशेष योगदान रहा है। इस शोध को करने में एक साल का समय लगा।
अभी तक की विधि काफी महंगी
अभी समुद्री जल से नमक को अलग करने के लिए आसवन या रिवर्स ओसमोसिस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो काफी महंगी है। अब इस तकनीक की मदद से फोटोथर्मल (प्रकाश ताप) सहायक अलवणीकरण विधि का उपयोग किया जा सकता है। यह अन्य विधियों से काफी सस्ती है।
मिट्टी के दीये से तैयार किया चुंबकीय नैनो कण
शोधकर्ताओं ने चुंबकीय छिद्रित कार्बन नैनो कणों को तैयार करने के लिए मिट्टी के दीयों का उपयोग किया। इसे बनाने के लिए कपास को नीकेल नाइट्रेट साल्यूशन में डुबो कर रखा। फिर उसे निकालकर सूखाने के बाद सरसों के तेल से डुबाया। उसमें आग का उपयोग भी किया गया। इस शोध के अनुसार, प्रकाश और गर्मी के संपर्क में आने पर ये नैनो कण पानी से डाई के अणुओं को पूरी तरह से हटा देते हैं। इसके अलावा ये कण इन्फ्रारेड विकिरणों को भी अवशोषित करते हैं।
तरीका भी अनोखा
डा. शंकर चाकमा के अनुसार, छिद्रित चुंबकीय कार्बन सामग्री फोटोथर्मल अनुप्रयोगों के लिए काफी उत्कृष्ट हैं, क्योंकि ये अनोखे तरीकों से प्रकाश तरंगों के साथ संपर्क बनाते हैं। अत्यधिक छिद्रपूर्ण होने से यह काफी प्रभावी रूप से काम कर पाता है।
इन कामों में मिलेगी मदद
- प्रकाश ऊर्जा को उष्मा ऊर्जा में बदलकर समुद्री जल से नमक को अलग करना।
- बर्फ को पिघलाना और बर्फ को न जमने देना
- दूषित और अपशिष्ट जल से पीने योग्य पानी निकालना
इस शोध से पानी को उपयोग के लायक बनाया जा सकता है। इससे पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों के लोगों को फायदा मिलेगा। इससे करीब 40 प्रतिशत तटीय समुदायों के लिए स्थानीय जल स्रोत उपलब्ध कराया जा सकता है, इसलिए यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है
- डा. शंकर चाकमा, सहायक प्रोफेसर, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, आइसर