मध्य प्रदेश में अभी तक राजनीति में जो नहीं हुआ है, वह अब देखने को मिल रहा है। जिस प्रदेश में पहले भावी सरकार की बात की जाती थी अब वहां भावी मुख्यमंत्री की बात की जाने लगी है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में कई ऐसे नेता हैं जो खुद को भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं। हालांकि, अभी बीजेपी और कांग्रेस दोनों में मुख्यमंत्री पद की डगर आसान नहीं है। इधर राजनीतिक गलियारों की बात करें तो हाल ही में आंदोलन से शिवराज की छवि का काफी नुकसान भी हुआ है। भाजपा के अंदरखाने में शिवराज का विरोध साफ देखा जा रहा है। जिसकी वजह उनका सभी विभागों पर नियंत्रण होना बताया जा रहा है। इधर चर्चा का विषय यह भी है कि अभी हाल हीम में सतना दौरे पर गए प्रदेश के तेजतर्रार मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने नारेबाजी कर उनके सीएम बनने महत्वकांक्षा को प्रकट कर दिया । हालांकि बाद में मीडिया से बात करते हुए डॉ मिश्रा ने इस बात का खंडन करते हुए कहा कि मप्र में शिवराज ही मुख्यमंत्री है और आगे भी वहीं रहेंगे। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रदेश में शिवराज के बाद अगर संगठन और संघ की नजर में कोई और बड़ा नाम आता है तो वह सिर्फ प्रदेश के गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा का ही है। अभी हाल ही में अपने गृह क्षेत्र के दौरे पर डॉ मिश्रा ने पार्टी के चार दिग्गज पूर्व मंत्रियों से मुलाकात कर राजनीतिक दृष्टि से सबको चौंका दिया था। अपने काम करने के तरीके के लिए पार्टी में विशेष स्थान बना चुके मिश्रा ने यहां भी वही तरीका अपनाया। चारों वरिष्ठ नेताओं से घर जाकर मुलाकात की। अनूप मिश्रा और माया सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। नारायण सिंह और जयभान सिंह पवैया से भी मुलाकात की। फिर अंत में यह बोलकर लौट गए कि सौजन्य भेंट करने आया था, हमारे साथी हैं, हम मिलते रहते हैं, कोई नई बात नहीं है। आज पारिवारिक बातें करने आया था, कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। प्रदेश के सियासी गलियारों में डा. मिश्रा का नाम सीएम की रेस में आगे आना कोई अचंभित करने वाली बात नहीं है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा प्रदेश सरकार में शिवराज सिंह चौहान के बाद दूसरे नंबर की हैसियत रखते है। कई बार उनके बयान मुख्यमंत्री के बयान से ज्यादा चर्चा में रहते है। हर सुबह उनके घर मीडिया या जमावड़ा लगा रहता है। अपनी हिंदूवादी छवि के कारण संघ की भी गुड लिस्ट मे ंउनका नाम आता है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी भरोसेमंद माने जाते है। बहरहाल, चर्चा मध्यप्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बदलने की है। जिसके पक्ष में यह तर्क दिए जा रहें है कि वें प्रदेश में फैले सरकारी भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा पाए है। बेरोजगारी की समस्या पर भी सरकार का नियंत्रण खत्म सा हो गया। प्रदेश में अपनी चौथी पारी में उनकी सांगठनिक पकड़ कमजोर पड़ गयी है। प्रदेश की सरकार अफसरों के भरोसे चल रहीं है। मंत्री, विधायकों, सांसदों से अधिक ताकतवर जिले के कलेक्टरों को बना दिया है। सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन की मांग को लेकर प्रदेश सरकार से नाराज चल रहे है। मंचों से अधिकारियों, कर्मचारियों का फिल्नायक की तर्ज पर निलंबन भी सरकारी कर्मियों की शिवराज के प्रति नाराजगी का कारण है। शायद परिवर्तन के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह भी हो सकता है कि प्रदेश में नए मतदाताओं में शिवराज के चेहरे का आकर्षण दिनों-दिन कम होता जा रहा है। उनकी मंचीय घोषणाएं जमीनी स्तर पर क्रियान्वित नहीं हो पा रही हैं। साथ ही सभी विभागों पर अपना कब्जा जमाकर बैठे है। इस कारण कई मंत्रियों की नाराजगी भी शिवराज को झेलनी पड़ सकती है। इन सब कारणों से सत्ता विरोधी वातावरण बन गया है। जिसे नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय नए चेहरे को सीएम बनाकर 2023 के चुनावी मैदान में उतरने से पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। आलाकमान के सामने शिवराज के विकल्प के तौर पर अब सबसे मजबूत दावेदार है प्रदेश के गृहमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा जिसका कारण उनका बेदाग और ऊर्जावान होना है। प्रदेश के मतदाताओं में नरोत्तम मिश्रा का चेहरा आकर्षण का केंद्र बन सकता है। उनकी आक्रामक शैली जनता को आकर्षित कर रहीं है। प्रदेश में उन्हें बोलडोजर मंत्री के रूप में खूब सुर्खियां भी मिल रही है। युवाओं में चर्चा तो यह भी है कि मिश्रा ही एमपी के योगी बाबा है। उनके तीखे तेवरों से वह संघ की भी पहली पसंद बताये जाते है। भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय समिति से कुछ समय पूर्व शिवराज को हटा कर अपनी नाराजगी के संकेत भी दे दिए थै। चेहरे परिवर्तन के यह कयास कितने सच के करीब है या हर बार की तरह से महज कयास ही साबित होगें। किँतु राजनीति के जानकारों का कहना है कि प्रदेश में 2023 के विधानसभा के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कमर कस ली है। देश के ह्रदय प्रदेश पर भाजपा किसी भी स्थिति में अपनी सत्ता काबिज रखना चाहेगी। इसको पूरा करने के लिए पुराने पड़ चुके शिवराज को बदलने में भी केंद्रीय नैतृत्व कोई गुरेज नहीं करेगा। नई सम्भावना को तलाशना वर्तमान बीजेपी की महत्वपूर्ण विशेषता बन गयी है। जो कि नरोत्तम मिश्रा को सीएम बनाकर ही पूरी की जा सकती है।