
इधर, पुराने शहर में चल समारोह निकाला गया। इसमें 27 बड़ी झांकियां शामिल हुईं। झिलमिल झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। देर रात शुरू हुए चल समारोह को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मार्ग के इर्द-गिर्द मौजूद रहे।
शहर के विसर्जन घाटों पर बुधवार देर रात तक मातारानी की मूर्तियों के विसर्जन का सिलसिला चलता रहा। बुधवार रात तक 1500 मां दुर्गा की मूर्तियों विसर्जन हो चुका था। चल समारोह की झांकियों में आईं मूर्तियां अलग हैं। घाटों पर मूर्तियों का सुरक्षित विसर्जन कराने 150 से अधिक गोताखोरों को आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में नियुक्त किया हुआ है। ये जलकुंड से 20 फीट पहले ही प्रतिमाएं लेकर उसे विसर्जित कर देते हैं।