
भोपाल। मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में कराने की शुरुआत करने वाले मध्यप्रदेश ने एक और अच्छी पहल की है। हिंदी दिवस के मौके पर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने जाने-माने मेडिकल रिसर्च जर्नल द लैंसेट के साउथ एशिया एडिशन को हिंदी में प्रकाशित करने का ऐलान किया है।
ये अपने आप में अहम ऐलान है क्योंकि 'द लैंसेंट' मैगजीन को दुनिया भर में चिकित्सा के क्षेत्र में बड़े ही सम्मान से देखा जाता है। इसमें छपने वाले शोध छात्रों के साथ उन्हें पढ़ाने वाले प्रोफेसर के लिए भी अहम होते हैं। मैगजीन का हिंदी अनुवाद राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग का "हिंदी चिकित्सा प्रकोष्ठ मंदार" करेगा, जिसने एमबीबीएस की किताबों का अनुवाद किया है।
लैंसेट एक साप्ताहिक मेडिकल जर्नल है। इस मैगजीन का संपादकीय कार्यालय लंदन, न्यूयार्क शहर और बीजिंग में मौजूद है। इसकी स्थापना 1823 में इंग्लैंड में हुई थी। लैंसेट कई विशेष पत्रिकाएं भी प्रकाशित करता है। मसलन-द लैंसेट न्यूरोलाजी, द लैंसेट आन्कोलाजी, द लैंसेट इंफेक्शियस डिजीज, द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन आदि। पत्रिका के प्रधान संपादक रिचर्ड हार्टन हैं।
गुरुवार को 'द लैंसेट' की डिप्टी पब्लिशिंग हेड फियोना मेकलेब और एल्जेवीयर पब्लिकेशन के प्रमुख शंकर कौल ने हिंदी चिकित्सा प्रकोष्ठ मंदार का दौरा किया। वहां पर होने वाले काम को समझा, खुद चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग ने दोनों अधिकारियों को मंदार का दौरा कराया और बताया कि यहां किस तरीके से काम होता है। दोनों अधिकारियों ने हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई कराने के कदम की सराहना भी की।
इस दौरान विश्वास सारंग ने बताया कि द लैंसेंट का अंग्रेजी के अलावा अब तक केवल तीन भाषाओं में ही प्रकाशन होता था। हिंदी चौथी भाषा होगी जिसमें इसका प्रकाशन होगा।