इंदौर। देश को आत्मनिर्भर बनाने में अपने शहर में स्थापित राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआरकेट) अहम भूमिका निभा रहा है। दरअसल, आरआरकेट ने अपनी टेक्नोलाजी से एक ऐसी मशीन तैयार की है, जो देश के लिए कई दृष्टिकोण से उपयोगी साबित होगी। यह मशीन मेटल थ्रीडी प्रिंटिंग है। इसकी मदद से अब देश में ही किसी भी धातु की हूबहू थ्रीडी प्रिंटिंग करके उपकरण तैयार किए जा सकेंगे। अब तक यह मशीन यूरोप और अमेरिका से पांच करोड़ रुपये खर्च कर मंगवाई जाती थी, किंतु आरआरकेट में बनी मशीन अब आधी से भी कम कीमत में देश में ही उपलब्ध हो सकेगी।
हैदराबाद में आयोजित एएमटेक 2023 एक्जीबिशन में इस मशीन को लोकेश मशीन्स लिमिटेड द्वारा लांच किया गया। अब यह मशीन बाजार में आने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस कार्यक्रम में
आरआरकेट के निदेशक डा. शंकर वी नाखे ने मशीन का अनावरण किया। इस अवसर पर डा. नाखे ने कहा कि इस घड़ी का हमें कई दिनों से इंतजार था।
टेक्नोलाजी के एग्रीमेंट के दौरान हमने तय किया था कि इस मशीन को एक वर्ष के भीतर बाजार में लांच करेंगे।
इंक्यूबेशन सेंटर की टीम और आरआरकेट टेक्नोलाजी डेवलपर की टीम के सहयोग से यह मशीन अब बाजार में आने के लिए तैयार है। स्वदेश में निर्मित इस मशीन के आने से भारतीय
बाजार में मेटल थ्रीडी प्रिंटिंग मशीनें आधी कीमत में उपलब्ध हो पाएंगी। इसी प्रकार हम आने वाले समय में और भी इनोवेशन पर काम करेंगे ताकि देश आत्मनिर्भर की ओर अग्रसर हो सके।
यह गौरव का क्षण
इस दौरान लोकेश मशीन्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर लोकेश्वर राव ने कहा कि देश के लिए काम कर पाने के चलते यह हमारे लिए गौरव का क्षण है। इस टेक्नोलाजी के जरिए हमारी कंपनी के कार्य का विस्तार हुआ है। अब हम
मेटल थ्रीडी प्रिंटिंग में भी भाग ले रहे हैं। हम अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए इस टेक्नोलाजी को विदेश में भी बेच सकेंगे। इस अवसर पर इंक्यूबेशन सेंटर एआइसी पाइ हब आरआरकेट के प्रमुख डा. सीपी पाल भी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यह टेक्नोलाजी डा. पाल और आरआरकेट के टेक्नोलाजी डेवलपर के मार्गदर्शन में तैयार की गई है।
फरवरी में शुरू हुआ था कार्य
इस मशीन के लिए टेक्नोलाजी आरआरकेट में तैयार की गई। इसके बाद आरआरकेट के इंक्यूबेशन सेंटर द्वारा टेक्नोलाजी की मदद से आठ महीनों में मशीन तैयार की गई। दरअसल, 20 फरवरी 2023 को तीन कंपनियों के साथ आरआरकेट ने मेटल थ्रीडी प्रिंटिंग मशीनों का व्यवसायीकरण करने के लिए इंक्यूबेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। उनमें से लोकेश मशीन्स लिमिटेड ने आरआरकेट के इंक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से मशीन तैयार कर ली है। लोकेश मशीन्स लिमिटेड का सालाना टर्नओवर करीब 320 करोड़ रुपये है। यह कंपनी 30 प्रतिशत मशीनों का निर्यात करती है।
केवल दो करोड़ में मिलेगी
मेटल थ्रीडी प्रिंटिंग की मशीनें विदेशों से पांच करोड़ की लागत पर मंगवाई जाती हैं। देश में निर्मित इस मशीन से अब यह मशीन आधे से भी कम यानी दो करोड़ रुपये में ही उपलब्ध होगी। इसके अलावा इस मशीन का डिफेंस, एयरोस्पेस, मेडिकल और पावर जेनरेशन इंडस्ट्री में उपयोग किया जाएगा। मेटल थ्रीडी प्रिंटिंग के जरिए कई तरह के पार्ट्स का निर्माण किया जा सकेगा।