भारत ने नेपाल से झूठ बोला... पीएम मोदी और प्रचंड में नया एयर रूट समझौता, जानें क्‍यों भड़के हैं नेपाली

Updated on 02-06-2023 08:22 PM
काठमांडू/नई दिल्‍ली: भारत के दौरे पर आए नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड और पीएम मोदी के साथ मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच नया एयर रूट समझौता हो गया है। भारत ने इस बात पर सहमति जताई है कि वह दूसरी जगह से आ रही उड़ानों को पश्चिमी महेंद्रनगर के ऊपर से जाने का रास्‍ता देगा। हालांकि भारत ने इस पर शर्त रखी है कि इन विमानों की उड़ान 15 हजार से लेकर 24 हजार फुट के बीच होगी। भारत में जहां इसे बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं नेपाल के विशेषज्ञ इस पर भड़के हुए हैं।

नेपाल के अखबार काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाली विशेषज्ञों का मानना है कि 15 हजार से 24 हजार फुट की ऊंचाई बड़े विमानों के लिए बहुत कम है। उन्‍होंने कहा कि भारत पहले ही साल 2018 में निचली उड़ान भर रहे विमानों को प्रवेश की अनुमति दे चुका है। इस समझौते के बाद प्रचंड ने गुरुवार को कहा था, 'हमने अतिरिक्‍त एयर एंट्री रूट पर बात की थी। नेपाल द्विपक्षीय एंट्री रूट को लेकर भारत के सकारात्‍मक संकेत का स्‍वागत करता है।'

'भारत ने नेपाल से झूठ बोला है'

प्रचंड इस बात को लेकर बहुत आशान्वित हैं कि भारत पश्चिमी नेपाल के दो नए हवाई अड्डों भैरवा और पोखरा को जोड़ने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय हवाई रूट को खोलने पर विचार करेगा। वहीं नेपाली विशेषज्ञ इससे नाखुश हैं और आरोप लगा रहे हैं कि भारत ने नेपाल से झूठ बोला है। नेपाल के नागर विमानन प्राधिकरण के पूर्व डायरेक्‍टर संजीव गौतम ने कहा, 'भारत ने पहले ही इस रास्‍ते को मंजूरी दी है। यह निचली उड़ान भर रहे विमानों के लिए व्‍यवहारिक नहीं है।'

गौतम ने कहा कि यह रास्‍ता केवल बुद्धा एयर के लिए ही सही है, न कि दूसरी एयरलाइन के लिए। उन्‍होंने कहा कि 28000 फुट के नीचे उड़ान भरना ऑपरेशन खर्च के लिहाज से व्‍यवहारिक नहीं है। ज्‍यादा ऊंचाई पर हवा कम होती है और इससे विमानों को घर्षण का सामना नहीं करना पड़ता है। यही वजह है कि इन विमानों का तेल कम खर्च होता है और पैसा बचता है। उन्‍होंने कहा कि पीएम प्रचंड ने बड़ा मौका गंवा दिया। हालांकि उन्‍होंने कहा कि एक अच्‍छी पहल हुई है। भारत 'सीमा के नजदीक संचालन' के लिए सहमत हो गया है।

भारत-नेपाल विवाद का चीन कनेक्‍शन

संजीव गौतम ने कहा कि अगर मौसम की दिक्‍कत होगी और एयरपोर्ट नजदीक होंगे तो दोनों के नागरिक विमान एक-दूसरे के हवाई इलाके में जा सकेंगे। नेपाल के कुछ अधिकारियों ने यह भी कहा कि ये दोनों ही एयरपोर्ट भूराजनीति का शिकार हो गए हैं क्‍योंकि पोखरा एयरपोर्ट का निर्माण चीन के पैसे से किया गया है, वहीं भैरवा एयरपोर्ट को चीनी कंपनी ने बनाया है। उन्‍होंने कहा कि यह साफ है कि यह भूराजनीति का मामला है। बता दें कि भारतीय सीमा के बेहद करीब इन दोनों ही एयरपोर्ट को नेपाल के वामदलों की सरकारों ने चीन के साथ मिलकर बनवाया है। भारत इसका विरोध करता रहा है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 17 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिकी संसद ने भारी बहुमत से 'रूस बैन बिल' (Lindsey O. Graham Sanctions Act) पारित कर दिया है। इस बिल के पास होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी…
 17 September 2026
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: 16 सितंबर को भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से पाकिस्तान उच्चायोग को जारी किया गया कड़ा विरोध पत्र सिर्फ एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि समंदर में दोनों…
 17 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बड़ी बैठक की योजना बना रहे हैं। बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के दौरान हो सकती है,…
 17 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को कहा कि सऊदी अरब पर हूती हमलों के बढ़ते मामलों के बीच 'मक्का रक्षा गठबंधन' को लागू करने की स्थिति…
 17 September 2026
मॉस्को: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी। अपने शुभकामना संदेश में पुतिन ने वैश्विक मंच पर मोदी की अहमियत का जिक्र किया…
 17 September 2026
काबुल: सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों के बीच तुर्की के इंटेलिजेंस चीफ इब्राहिम कालिन और अधिकारी अल-कुबैसी के नेतृत्व में कतर का एक सीनियर सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल काबुल पहुंचा है।…
 17 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत लंबे समय से अशांति का शिकार है। सूबे में कई सशस्त्र गुट पाकिस्तान की सेना से आजादी के लिए लड़ रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने…
 17 September 2026
सना: यमन में बीते करीब एक महीने से हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकार में लड़ाई चल रही है। यमन का बड़ा इलाका पहले से ही हूतियों के नियंत्रण में…
 16 September 2026
टोक्यो: जापान धान की खेती से दोहरा लाभ कमा रहा है। धान के बचे वेस्ट और बिना इस्तेमाल वाले बेकार चावल को जापानी कॉस्मेटिक्स और रोजमर्रा के घरेलू सामान बनाने…
Advt.