भुवनेश्वर दयाल शर्मा (स्वतंत्र पत्रकार)
मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल भ्रष्टाचार का अखाड़ा बन गया है। आवासाें के नामांतरण काे लेकर गृह निर्माण मंडल अपनी नीतियां बदल बदल कर गृह स्वामियाें के साथ खिलवाड़ ़ कर रहा है। घटिया सामाग्री का उपयाेग कर भवन निर्माण कराने वाला गृह निर्माण मंडल केवल रूपये एठने का एटीएम बन गया है। सालों से लंबित प्रकरणाें का निपटारा नही हाेना या करना आवंटियों काे मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा है।
गृह निर्माण मंडल के पास जाे संपत्ति अधिकारी है वह राजनैतिक तलवार चलाने का अभ्यास वर्षो से कर रहे है। प्रशानिक अधिकारी अपनी पाेस्टिंग काे लेकर दुःखी है। मानसिक अवसाद झेल रहे कमिश्नर अपनी नियुक्ति से खुश नहीं हैं। गृह निर्माण मंडल के पदाधिकारी मूल दस्तावेजों की छाया प्रति सूचना के अधिकारी के माध्यम से भी उपलब्ध नहीं कराते है। भाड़ा क्रय योजना में खरीदे गये मकानाें की काेई प्रमाणित सूची गृहनिर्माण मंडल उपलब्ध नही करा रहा है गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष आैर कमिश्नर किसी भी तरह से गृहनिर्माण मंडल की कब्र खाेदने की नीव रख रहे है। भ्रष्टाचार का यह आलम है नाे ड्यूज सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बाबू 15 से 20 हजार रूपये लेता है मकानाें के आवास भ्रतकाें के नाम जाेड ़ दिये जाते है। जाे बाब ू रिकार्ड उपलब्ध करता है। उसे अगर रिश्वत न दा े तो फाइल नहीं है। बाेलता लिखता है।
गृह निर्माण मंडल में जाे अधिकारी प्रति नियुक्ति पर आते वह अपनी संपत्ति का आर्थिक ग्राफ बढ़ाने में जुट जाते है गृह निर्माण मंडल बनाम लुटेरा विभाग बन गया है। आवास मंत्री आैर गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अपने अपने अधिकाराें काे लेकर चिंतित है। अध्यक्ष काे टूर करने से फूर्सत नहीं मिलती है। जनता की कमाई से टूर के बिलाें की भरपाई आैर केबिनेट मंत्री क े दर्जे का राेब बढ़ा रहे है उन्हे अपने चापलूसाें से फूर्सत मिले तब ताे वाे जनता जनार्दन की परेशानियाें काे समझे। गृह निर्माण मंडल डूबती नाव है जिसमें जनता के टैक्स की कमाई फिजूल खर्ची में डूबाई जा रही है।