
डिंडौरी और उमरिया में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नर्मदा सहित सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। डिंडोरी के जोगी टिकरिया का पुल डूबा हुआ है। पिछले सात घंटे से जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे 45 पर आवागमन प्रभावित है।
डिंडौरी के शहपुरा स्थित बिलगांव बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं। उमरिया के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के चार गेट दो-दो मीटर खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।
सतना-मैहर के साथ उमरिया जिले में विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर 26 सितंबर को सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। जलभराव और लगातार बारिश को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
बरगी बांध में पानी को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार को पांच गेट खोले गए थे। इसके बाद भी पानी की आवक लगातार जारी रही। लिहाजा, शनिवार को चार गेट और खोले गए।
अब बरगी बांध के नौ गेटों से पानी छोड़ा जा रहा है। इस जल निकासी के कारण नर्मदा के घाटों पर वर्तमान जल स्तर से लगभग 6 से 8 फीट की वृद्धि हुई है।
पूर्वी MP में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम एक बार फिर एक्टिव है। गहरे अवदाब की तीव्रता भले ही लगातार कम हो रही हो, लेकिन इसकी उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में गति और इससे जुड़ी नमी पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
इसलिए अगले 48 घंटे विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम नागरिक स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखें। साथ ही नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवागमन से बचें।
मानसून की विदाई को 5 दिन बचे
एमपी में दक्षिण-पश्चिम मानसून का पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक है। यानी, मानसून की विदाई को पांच दिन बचे हैं। आने वाले दिनों में मानूसन की विदाई होने लगेगी। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।
सामान्य बारिश से 2.2 इंच नीचे चल रहा प्रदेश
IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी, 34.7 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.9 इंच (937.9 मिमी) की तुलना में 2.2 इंच कम है।
वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बराबर और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा बराबर है।
बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। शुक्रवार को भी आंकड़ा बराबर पर आ गया।
वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% कम पानी गिरा है।
इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह कमी घट गई। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।
आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। इसके बावजूद 13% कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और अगस्त में बारिश का कोटा पूरा हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि अब तक प्रदेश में 6% कम बारिश हुई है।
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।
भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।
वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश
इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है।
ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी
ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी।
सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले चार साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी।
जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है।
वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है।
उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल
उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी करीब 43 इंच पानी गिरा था।
वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 को बना था। सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है।