भारत को अरबों डॉलर की सबमरीन बेचने के लिए जर्मनी और स्‍पेन में लगी होड़, गुहार लगाने पहुंचे जर्मन चांसलर

Updated on 25-10-2024 02:01 PM
बर्लिन: दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीददार भारत को हथियार बेचने की होड़ लगी हुई है। ताजा मामला जर्मनी बनाम स्‍पेन का है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्‍चोल्‍ज भारत के दौरे पर पहुंचे हैं। उनकी इस यात्रा का एक बड़ा मकसद भारत को हथियार बेचना है। ओलाफ के साथ जर्मनी के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री भी पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान जर्मन चांसलर ने सैन्‍य रिश्‍ते मजबूत करने पर पीएम मोदी से बात करेंगे। जर्मनी भारत के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर बात कर रहा है। जर्मनी के चांसलर का बड़ा मकसद भारत को सबमरीन बेचना है। इससे पहले पिछले साल भी जर्मनी के चांसलर दो बार भारत आए थे। जर्मनी जिस सबमरीन डील पर नजरे गड़ाए बैठा है, उस पर एक अन्‍य यूरोपीय देश स्‍पेन की भी नजर है। आइए समझते हैं पूरा मामला
भारत कई साल से प्रोजेक्‍ट 75(I) के तहत 6 अत्‍याधुनिक परंपरागत पनडुब्‍ब‍ियां खरीदना चाहता है। यह सबमरीन एयर इंडिपेंडेंड प्रपल्‍शन यानि एआईपी की तकनीक से लैस होगी। इस डील के लिए जर्मनी और स्‍पेन दोनों ही दावा ठोक रहे हैं। भारत जिस देश के साथ यह डील करेगा, उसके साथ आने वाले कई वर्षों तक रणनीतिक भागीदारी मजबूत हो जाएगी। जर्मनी की कंपनी TKMS ने भारत की सरकारी कंपनी मजगांव डॉक शिपबिल्‍डर्स के साथ इस मेगा कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए गठजोड़ बनाया है। इससे पहले जर्मनी की कंपनी ने भारत से दूरी बना रखी थी क्‍योंकि उसके पास बहुत ज्‍यादा ऑर्डर है।

जर्मनी बनाम स्‍पेन में मची होड़


जर्मनी सरकार के कहने पर TKMS ने भारतीय सौदे के लिए जोर लगाना शुरू किया। जर्मनी की कंपनी चाहती है कि भारत से सरकार से सरकार के बीच सबमरीन डील हो जाए। TKMS ने अपनी एआईपी तकनीक को इंडियन नेवी के फील्‍ड ट्रायल के दौरान दिखाया था। इसमें द‍िक्‍कत यह है कि भारतीय नौसेना को बड़ी सबमरीन चाहिए लेकिन जर्मनी की Type 214 पनडुब्बी छोटी है। वहीं TKMS को भरोसा है कि भारत के साथ ऐतिहासिक रिश्‍तों की वजह से उसे ही यह डील मिलने जा रही है।

जर्मनी के बाद स्‍पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज भी 27 अक्‍टूबर को भारत आ रहे हैं। पिछले 18 साल में किसी स्‍पेनी नेता की यह पहली भारत यात्रा है। यह दोनों ही देशों के बीच बढ़ते रिश्‍तों को दर्शाता है। स्‍पेन भी अपनी पनडुब्‍बी भारत को बेचना चाहता है। स्‍पेन की कंपनी नवांतिया ने भारत की दिग्‍गज प्राइवेट कंपनी एल एंड टी के साथ गठजोड़ किया है। नवांतिया की पनडुब्‍बी भी एआईपी की तकनीक से लैस है।

18 साल बाद भारत की यात्रा पर आ रहे स्‍पेन के पीएम


कंपनी ने बताया कि उसकी एआईपी से लैस पनडुब्‍बी साल 2026 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। दोनों ही भारत सरकार के साथ डील करना चाहते हैं। व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि दोनों ही यूरोपीय नेताओं की यात्रा यह दिखाती है कि वे भारत के साथ रक्षा संबंध मजबूत करना चाहते हैं। भारतीय नौसेना ने दोनों ही देशों की एआईपी तकनीक का परीक्षण कर लिया है। अब सरकार को अंतिम फैसला लेना है।

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