नई दिल्ली: अडानी ग्रुप को एक और मामले में राहत मिली है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने गौतम अडानी, उनके बड़े भाई विनोद अडानी और अडानी परिवार के अन्य सदस्यों को चार ग्रुप कंपनियों में मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों के उल्लंघन के आरोपों से बरी कर दिया है। साथ ही सेबी ने सही और पूरी जानकारी न देने के लिए नासिर अली शबान अहली और चांग चुंग-लिंग पर ₹20-20 लाख का जुर्माना लगाया है।सेबी ने एक अलग सेटलमेंट ऑर्डर में कहा कि अडानी ग्रुप की चार कंपनियों, चेयरमैन गौतम अडानी और 13 अन्य लोगों ने MPS नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले को कुल ₹1.48 करोड़ का सेटलमेंट अमाउंट देकर सुलझा लिया है। यह इस महीने सेबी का अडानी ग्रुप से जुड़ा तीसरा सेटलमेंट ऑर्डर है।क्या हैं आरोप?
इस सेटलमेंट में ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन और अडानी ट्रांसमिशन (अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस) के साथ-साथ उनके डायरेक्टर्स और अन्य सीनियर अधिकारियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही शामिल है। सेबी को जून और जुलाई 2020 के दौरान शिकायतें मिली थीं। इनमें आरोप लगाया गया था कि अडानी ग्रुप की कुछ लिस्टेड कंपनियों ने MPS नियमों का पालन नहीं किया है।सेबी ने 23 अक्टूबर 2020 को इस मामले की जांच शुरू की गई। इसके बाद, सेबी ने सितंबर 2024 में कारण बताओ नोटिस जारी किया और फिर मार्च 2025 में एक सप्लीमेंट्री नोटिस जारी किया। इस मामले में मुख्य आरोप MPS नियमों के उल्लंघन का था, जिसके तहत कम से कम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग अनिवार्य है।सेबी ने क्या कहा?
आरोप था कि दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों EIFF (इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड्स) और EMR (EM रिसर्जेंट फंड) ने विनोद अडानी के निर्देश पर अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन और अडानी ट्रांसमिशन के शेयरों में निवेश किया था। इसी तरह Opal ने भी अडानी पावर के शेयरों में विनोद अडानी के ऑर्डर पर निवेश किया था। दावा किया गया था कि Opal को वही कंट्रोल करते थे।
सेबी ने अपने शो कॉज नोटिस में आरोप लगाया था कि निवेश के ढांचे के जरिए कुल मिलाकर लगभग ₹1,984 करोड़ का गलत तरीके से मुनाफा कमाया गया। रेगुलेटर ने कहा कि इस मामले में शामिल 12 व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ MP और धोखाधड़ी वाली ट्रेडिंग के नियमों के उल्लंघन के आरोप साबित नहीं हुए हैं।शेयरहोल्डिंग पर सवाल
सेबी ने कहा कि इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे कि विनोद अडानी का दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर प्रभावी नियंत्रण था। आरोप था कि जून 2013 और जून 2018 के बीच EIFF और EMR का अडानी ग्रुप की कंपनियों में किया गया निवेश वैध पब्लिक शेयरहोल्डिंग नहीं थी। बल्कि उन पर प्रभावी रूप से विनोद अडानी का नियंत्रण था और उन्हें प्रमोटर-ग्रुप की होल्डिंग माना जाना चाहिए था।