भोपाल। ऐ अल्लाह! हम गुनहगार हैं, खतावार हैं, बदकार हैं...तेरे हुक्म से गाफिल हैं लेकिन जो हैं, जैसे हैं तेरे बंदे हैं...ऐ अल्लाह, तू रहीम है, हम पर रहम कर दे... तू करीम है, हम पर करम कर दे। हमारे गुनाहों का बोझ बहुत है, लेकिन तू गुनाहों को माफ करने वाला है, अपने बंदों पर रहम करने वाला है... हमें भी माफ कर दे...! ऐ अल्लाह, सारी दुनिया को इल्म के नूर से रोशन कर दे...ऐ अल्लाह सारी कायनात में अमन, सुकून, भाईचारे की हवाएं चला दे... ऐ अल्लाह इस शहर, सूबे, मुल्क को कामयाबी, तरक्की की बुलंदियों से मालामाल कर दे...ऐ अल्लाह दुनिया के हर इंसान को सच्चाई, ईमानदारी और हक पर चलने की आसानी फरमा दे...! यह सब बातें राजधानी के ईंटखेड़ी में चल रहे चार दिवसीय इज्तिमा के समापन पर सामूहिक दुआ में कही गईं।
लाखों जमातियों ने की शिरकत
लाखों लोगों के मजमे की शिरकत के बीच मौलाना सआद साहब ने जब इज्तिमागाह में यह दुआ करवाई तो हर तरफ से उठने वाली आमीन की आवाज ने माहौल को रुहानियत से भर दिया। आलमी तब्लीगी इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को सुबह करीब 10 बजे तक मौलाना सआद साहब का बयान चलता रहा। इस दौरान तब्लीग के छह बिंदुओं को तफ्सील से समझाते हुए उन्होंने दुनियाभर के लिए रवाना होने वाली जमातों को तालीम दी। इस दौरान उन्होंने दुआ को अल्लाह और बंदे के बीच स्थापित होने वाला सीधा कनेक्शन करार दिया। मौलाना ने कहा कि दुआ सबसे बड़ा हथियार, इससे हर मुश्किल के खिलाफ जंग लड़ी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इज्तिमाई दुआ पर फरिश्ते आमीन कहते हैं। हर दुआ पर आमीन की मुहर लगना जरूरी है। उन्होंने ये भी समझाया कि दुआ की कुबूल होने के लिए जरूरी है कि इंसान हराम खाना छोड़ दें। सुबह करीब 10:10 बजे सआद साहब ने दुआ शुरू की, जो करीब 27 मिनट से ज्यादा चली। इस दौरान जिसे जहां जगह मिली, वहां जमीन पर बैठक पर दुआ पढ़ता नजर आया।
दुआ से पहले हुआ बयान
दुआ-ए-खास से पहले मजबे को खिताब करते हुए मौलाना सआद साहब ने कहा कि तब्लीग का काम हमारे आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्ल के पसंदीदा कामों में से एक है। उन्होंने दीन की खातिर बेहद तकलीफ और परेशानियां उठाईं हैं। उन्होंने कहा कि आज इंसान ने अपनी जरूरत को दुनिया के आसपास सीमित कर लिया है। जबकि अपनी असल जिंदगी आखिरत के लिए तैयारी करने की उसे फिक्र नहीं है।
रवाना हुई सैकड़ों जमातें
इज्तिमा के आखिरी दिन इज्तिमागाह से करीब दो हजार जमातें रवाना हुईं। इनमें 14 विदेशीं जमातें भी थीं। यह जमातें देशभर और दुनिया के कोने-कोने में जाकर तब्लीग का काम करेंगी। 10 लाख से अधिक लोगों की मौजूदगी ने इज्तिमागाह और आसपास के क्षेत्र व पुराने शहर के भोपाल रेलवे स्टेशन व आसपास की सड़कों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी।
रेंगते रहे वाहन
आखिरी दिन इज्तिमा में शामिल होने के लिए जन-सैलाब उमड़ पड़ा। इससे पुराने शहर की सड़कों पर घंटों तक वाहन रेंगते रहे। इज्तिमा स्थल पर दुआ में शामिल होने के लिए सुबह सात बजे से लोगों का आना शुरू हो गया था। सबसे अधिक भीड़ बैरसिया रोड फ्लाय ओवर ब्रिज पर दिखी।