
हरदा। नर्मदा के पावन तट पर बसे हंडिया में आज भी सिख धर्म के 10 वें गुरु गोविंद सिंह की सनद मौजूद है। जिसे ब्राह्मण परिवार 15 पीढ़ियों से संजोए हुए है। अब इस परिवार के मुखिया दादा ने अपने पोते को परिवार की धरोहर संभालने के लिए सौंपी है। हंडिया का व्यास परिवार गुरु गोविंद सिंह की सनद को गुरु का आशीर्वाद मानकर संभाले हुए है। इसकी एक-एक कापी अमृतसर व हंडिया गुरुद्वारा में भी रखी गई है। 17 वीं शताब्दी में गुरु गोविंद सिंह उत्तर भारत से महाराष्ट्र के नांदेड़ जाते समय इस नर्मदा तट पर हंडिया में रुके थे। यहां ब्राह्मण परिवार की सेवाभाव भाव से प्रभावित होकर उन्होंने सनद लिखकर सौंपी थी। इसमें लिखा कि यहां आने वाला सिख समुदाय का हर व्यक्ति इस सनद के दर्शन कर इस परिवार को मान-सम्मान व भेंट दें। गुरु गोविंद सिंह की लिखी सनद एक विशेष स्याही से लिखी गई है। व्यास परिवार के पं. नवीन व्यास ने बताया कि 17 वीं शताब्दी से गुरु गोविंद सिंह का लिखा दस्तावेज संभालकर रखे हैं। यह गुरु गोविंद सिंह का आशीर्वाद है, जो अब तक कई पीढ़ियों के सिर पर बना हुआ है।
व्यास परिवार की पंद्रह पीढ़ियां
व्यास परिवार के नवीन व्यास ने बताया कि उनकी पंद्रह पीढ़ियां गुरु गोविंद सिंह की सनद को संजोए रखी है। यहां देशभर से सिख समाज के लोग सनद के दर्शन करने आते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज बोंदर भटट को सनद लिखकर दी गई। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी सदाराम, बापू भट्ट, ओंकार, रामेश्वर व्यास, सिद्धश्वेर और गोकुल प्रसाद को मिली। इसके बाद से गोकुल प्रसाद व्यास की पत्नी गीता बाई ने सनद को संभाले रखी। अब नवीन व्यास अपने पूर्वजों की स्मृति को संभाले हुए है।
सेवा भाव देखकर दी सनद
नवीन व्यास ने बताया कि करीब 300 साल पहले गुरु गोविंद सिंह जी नांदेड़ जाते समय हंडिया में भी कुछ समय रुके थे। तब व्यास परिवार ने उनकी समर्पण भाव से सेवा की। इससे खुश होकर गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने हाथों से लिखकर एक सनद इस परिवार को दी थी।