
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिहं चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाने और विकास के लिये हर नागरिक अपना योगदान दे। मध्यप्रदेश के नागरिक कोई एक नेक कार्य अपनाएँ। इनमें पौधे लगाना, पर्यावरण-संरक्षण पानी बचाना, बिजली की बचत, नशामुक्ति शामिल हों। जनता के सहयोग से ही मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाएंगे। हर नागरिक सर्वश्रेष्ठ योगदान दे। जन-भागीदारी के मंत्र से आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण करें। सरकार के साथ सभी के सहयोग से हमें मध्यप्रदेश बनाना है। प्रदेश के साढ़े आठ करोड़ नागरिकों के 17 करोड़ हाथ आगे आयें और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज जबलपुर में गैरीसन ग्राउंड में गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद जनता को संबोधित कर रहे थे।
नर्मदा मैया का कॉरिडोर, घाट परस्पर जुड़ेंगे
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर में आकर मन प्रसन्न है। कल संध्या के समय नर्मदा जी के घाट पर जाने का अवसर मिला। नर्मदा मैया हम सभी को आशीर्वाद देती हैं। जबलपुर के नर्मदा घाटों का कॉरिडोर बनाया जायेगा। नर्मदा के घाटों के उन्नयन कार्य के साथ ही उन्हें परस्पर जोड़ने का कार्य कर नर्मदा पथ विकसित किया जायेगा। तीन चरणों में अलग-अलग नर्मदा परिक्रमा पथ बनेंगे।
औद्योगिक क्षेत्र का विकास
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति के लिये बहुआयामी प्रयास किये जा रहे हैं। हाल ही में इंदौर में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 15 लाख 40 हजार 550 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इससे करीब 29 लाख लोगों को जीविका मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जबलपुर में भटौली क्षेत्र में औद्योगिक नगर विकसित होगा। इसके लिये भूमि चिन्हित कर ली गई है। गारमेन्ट और टेक्सटाइल की इकाइयाँ बनेंगी। ये इकाइयाँ बहन और बेटियों के आर्थिक उन्नयन का भी मजबूत माध्यम हैं। इस क्षेत्र में रहवासी इलाके विकसित होंगे। भंडारण सुविधाएँ भी विकसित होंगी। हमारा प्रयास है कि ग्रीन फील्ड शहर की अवधारणा को लागू करें। जबलपुर के इस क्षेत्र में रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग की निकटता होने से औद्योगिक विकास की अच्छी संभावनाएँ हैं। इन संभावनाओं को साकार किया जायेगा।
महाकौशल के विकास पर फोकस
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महाकौशल अंचल में अनेक विकास कार्य हो रहे हैं। करीब 66 हजार करोड़ की सिंचाई परियोजना के कार्य जारी हैं। केन-बेतवा परियोजना के लिये 44 हजार करोड़ की राशि प्राप्त हो रही है। बरगी बांध की निर्माणाधीन टर्नल पर स्लीमनाबाद के पास कार्य चल रहा है। अब तो विंध्य अंचल में नागौद तक पानी पहुँचने वाला है। जबलपुर के शहरी क्षेत्र के साथ ही निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों का तेजी से विकास होगा। जबलपुर में 3500 करोड़ रूपये लागत का रिंग रोड बन रहा है। प्रदेश का दूसरा ग्लोबल स्किल पार्क जबलपुर में बनाया जायेगा। इसमें युवाओं को प्रशिक्षित किये जाने की व्यवस्था होगी। प्रदेश के स्किल्ड युवा दुनिया के देशों में जाकर सेवाएँ देंगे। अधो-संरचना को मजबूत बनाने वाले सभी कार्य तेज गति से चल रहे हैं। पूरे प्रदेश में बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का संकल्प है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बन रहा शक्तिशाली भारत
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैभवशाली, गौरवशाली और शक्तिशाली भारत का निर्माण हो रहा है। भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था वाला देश है। आने वाले कुछ वर्ष में भारत का क्रम तीसरा होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कोरोना काल में वैक्सीन के निर्माण और अन्य देशों को सहयोग का उदाहरण दुनिया में प्रस्तुत किया। आज हमारा देश स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित है। आत्म-निर्भर भारत के निर्माण के लिये हमें आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।
प्रदेश की विकास दर बढ़ी, प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ी, मजबूत हुई अधो-संरचना
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की विकास दर में वृद्धि हुई है, जो इस समय 19.76 प्रतिशत है और सबसे ज्यादा है। देश की अर्थ-व्यवस्था में योगदान 3.6 प्रतिशत से बढ़ कर 4.6 हो गया है। इसी तरह प्रति व्यक्ति वार्षिक आय जो वर्ष 2003 में सिर्फ 13 हजार थी, वह बढ़कर 1 लाख 37 हजार हो गई है। अधो-संरचना को मजबूत बनाते हुए सिंचाई, सड़क, बिजली, पेयजल आदि कार्यों को पूरा किया गया। मध्यप्रदेश अब टूटी-फूटी सड़कों के लिये नहीं बल्कि 4 लाख किलोमीटर लम्बाई की शानदार सड़कों के लिये जाना जाता है।
नवकरणीय ऊर्जा में अग्रणी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगातार कार्य हो रहा है। रीवा के सौर ऊर्जा संयंत्र के बाद ओंकारेश्वर में बांध की जल राशि पर फ्लोटिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है। नीमच, शाजापुर, छतरपुर और मुरैना में भी सौर ऊर्जा परियोजनाएँ क्रियान्वित होंगी। प्रदेश में कभी 3 हजार मेगावाट से भी कम बिजली होती थी, जो अब आठ गुना से अधिक हो गई है।