
भोपाल। मोबाइल के जरिए चौबीसों घंटें संपर्क में रहने का वरदान विद्यार्थियों से लेकर करियर बना रहे युवाओं के लिए ध्यान भटकाने वाला साबित हो रहा है यह बात तो कई शोध में सामने आ चुकी है। इसी तरह मोबाइल पर लगातार जुड़े रहने का असर डाक्टरों के काम पर नजर आने लगा है। बड़ी संख्या में डाक्टर आपरेशन थियेटर (ओटी) में मोबाइल ले जा रहे हैं बल्कि वहां काल भी अटैंड कर रहे हैं। इसके चलते आपरेशन में गड़बड़ी के मामले सामने बढ़ते जा रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों ने भी आपरेशन थियेटर में मोबाइल की उपस्थिति और उपयोग पर चिंता जाहिर की है।
संक्रमण रहित ओटी में करते हैं मोबाइल पर बात
आपरेशन थियेटर में मोबाइल ले जाने की डाक्टरों की बढ़ती आदत के कारण उपचार प्रभावित हो रहा है। ओटी में एक बार सेनेटाइज होकर गाउन पहनने के बाद फोन का उपयोग नहीं किया जा सकता है। जबकि चलते आपरेशन में डाक्टर मोबाइल का उपयोग तक कर रहे हैं। ओटी में मोबाइल फोन ले जाने की गलत आदत पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं इस कारण यह समस्या बढ़ती जा रही है।
इनका कहना है
आपरेशन के पहले डाक्टर खुद को सेनेटाइज कर गाउन पहनता है। इसके बाद बाहर का वो ऐसा कोई समान को छू भी नहीं सकता जिसमें संक्रमण कि किसी भी तरह कि संभावना हो। इसमें मोबाइल फोन भी आता है, हालांकि माेबाइल फोन को अधिकांश ओटी के बाहर ही रखा जाता है।
- डा. आशीष गोहिया, अधीक्षक हमीदिया भोपाल
मैं जब भी ओटी में आपरेशन के लिए जाता हूं, तो फोन-चाबी को चेंजिंग रूम में रखता हूं। कभी आपरेशन के दौरान फोन उठाने की जरुरत ही नहीं समझता। घर या स्टाफ में किसी को बात करनी हो तो वो संदेश छोड़ देते हैं। सर्तकता रखनी जरुरी है।
- डा. अजय शर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन
हम हमारे कार्यकाल में ओटी या किसी आपरेशन के दौरान ओटी के अंदर फोन नहीं ले जाते थे। हिम्मत ही नहीं होती थी हमारी। हमें लगता था कि हमारे कारण कोई मरीज के आपरेशन में गड़बड़ी हुई तो बदनामी हो जाएगी। मेरे सेवा निवृत होने से पहले लोगों के हाथों में मोबाइल आ चुके थे, आज निश्चित तौर पर यह समस्या बढ़ती जा रही है।
- डा. रमेश बडवे, सेवा निवृत सर्जन
हमारे अस्पताल में ओटी में जाने से पहले डाक्टरों को चेंज रूम में मोबाइल छोड़ने को कहा गया है। वहीं ओटी में मरीजों की निजता का पूरा ख्याल रखने को भी कहा गया है।
- डा. राकेश श्रीवास्तव,सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल भोपाल
- आपरेशन थियेटर तो आधुनिक बना दिए गए लेकिन लापरवाही अब भी ले रही जान
केस -एक
प्रसव कक्ष में सेल्फी, गर्भवती की निजता दांव पर
हमीदिया अस्पताल में प्रसव कक्ष में स्टाफ नर्स और डाक्टरों के द्वारा मोबाइल फोन अंदर ले जाने का मामला सामने आ चुका है। डाक्टर और नर्सों ने होली पार्टी की एक फोटो खींचकर इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित भी कर दी। इस दौरान गर्भवती महिला का प्रसव कराया जा रहा था। इससे मरीज की निजता भंग हो गई थी। पहले अस्पताल प्रबंधन ने मामले को दबाने का प्रयास किया। लेकिन मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की गई थी। मोबाइल फोन से डाक्टर और नर्स रील बनाने और फोटो खीचने का काम कर रही थीं।
केस- दो
नर्मदापुरम जिला अस्पताल में आपरेशन के दौरान तत्कालीन सिविल सर्जन डा.डीपी सिंह महिला का गर्भवाशय निकालने का आपरेशन करते हुए वीडियो इंटरनेट मीडिया पर आया। यह वीडियाो ओटी के बाहर के कर्मचारी से बनवाया गया। डाक्टर ने इसे फेसबुक पर भी शेयर किया। मामले में काफी खींचतान मची थी। इस पर तात्कालनी सीएमएचओ डा.एएल मरावी ने कार्रवाई भी की। हालांकि बाद में मामले को दबा दिया गया।
केस- तीन
भोपाल में कैंची छोड़ने वाला मामला
भोपाल के एक निजी अस्पताल में डाक्टर द्वारा पेट में कैंची छोड़ने का मामला सामने आया है। इस केस के दौरान भी ओटी में फोन आने का मामला सामने आया था। लेकिन मामले में समझौता होने के कारण इस मामले की गहराई से जांच तक नहीं हो सकी है। हालांकि चार महीने तक पेट में कैंची रहने से पीड़ित महिला की मृत्यु भी हो चुकी है।