
भोपाल। भोपाल जिले की पांच विधानसभा क्षेत्र हुजूर, गोविंदपुरा, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, बैरसिया पर कांग्रेस को करारी हार मिली है। मध्य व उत्तर विधानसभा सीट को ही कांग्रेस बचा सकी। वर्ष-2018 में कांग्रेस ने तीन सीटों पर परचम लहराया था। मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में जीत दर्ज की थी। वहीं भाजपा ने पांच विधानसभा क्षेत्र बैरसिया, नरेला, हुजूर, गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्रों में कब्जा जमाया था।
इस बार कांग्रेस दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र भी हार गए। अब हारी हुई पांच विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने मंथन शुरू कर दिया है। हार की समीक्षा की जाने लगी है। साथ ही ऐसे भितरघातियों का पता करना शुरू कर दिया है, जिन्होंने मतदान के दौरान पार्टी के पक्ष में काम नहीं किया है। उनकी रिपोर्ट बनाकर कर कार्रवाई के लिए जिला कांग्रेस कमेटी जल्द ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों को सौंपेगी।
दरअसल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी जीत समझ रही थी। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में दूसरी बार चुनाव मैदान में लड़े पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की जीत सुनिश्चित मान रही थी। वहीं हुजूर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष-2018 करीब 15 हजार मतों से हारे नरेश ज्ञानचंदानी के जीतन की उम्मीद जता रही थी। भाजापा के रामेश्वर शर्मा ने भारी मतों से ज्ञानचंदानी को हरा दिया। बैरसिया में को अपने खाते में मान कर चल रही थी, लेकिन कांग्रेस को सफलता नहीं लगी। प्रत्याशी मतदाताओं का भरोसा जीतने में कामयाब नहीं रहे। नरेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने इस बार सबसे अधिक सक्रिय रहने वाले नेता मनोज शुक्ला को उतारा था। वो भी कोई जादू नहीं कर पाए। भाजपा के विश्वास सारंग से चुनाव हार गए।
इसी तरह बैरसिया में दूसरी बार कांग्रेस ने जयश्री हरिकरण चुनाव लड़ी थीं। उन्हें भी सफलता नहीं मिल सकी। भाजपा के विष्णु खत्री ने फिर उन्हें हरा दिया। ऐसे में कांग्रेस हार के कारणों का पता करने में जुट गई है। इसके लिए विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रभारियों, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना व जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव ने फोन पर चर्चा करनी शुरू कर दी है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना ने बताया कि हार के कारणों का पता करना शुरू कर दिया है। प्रत्याशियों की शिकायत मिलेगी कि किन कार्यकर्ताओं ने चुनाव में काम नहीं किया है, उनकी रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजा भी जाएगा। हार की समीक्षा करके रिपोर्ट कांग्रेस प्रदेश संगठन को सौंपी जाएगी।