
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव को भाजपा ने लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल की तर्ज पर लड़ा। यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर लड़ा गया तो मुख्यमंत्री शिवराज ¨सह चौहान ने धुआंधार 165 सभाएं कर ऐतिहासिक विजय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया। मोदी और शिवराज दोनों ही भाजपा के नायक रहे। मोदी ने प्रदेश में 14 सभाएं और इंदौर में एक रोड-शो किया था।
मुद्दों की आजमाइश के बावजूद मध्य प्रदेश का विधानसभा चुनाव जब रंग नहीं पकड़ पा रहा था तो उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर को जंबूरी मैदान में 'एमपी के मन में है मोदी' की सार्थकता के साथ गहरा कर दिया था।
केंद्र की योजनाओं से मध्य प्रदेश के गरीब के घर में खुशहाली पहुंचाने का सीधा रास्ता दिखाते हुए मोदी ने मध्य प्रदेश की समृद्धि से भारत की वैश्विक पहचान के समीकरण को भी समझा दिया।
जैसा कि सियासी गलियारों में पिछले कई महीनों से महसूस किया जा रहा था कि भाजपा ने प्रादेशिक चेहरों के बजाय मोदी और भाजपा सरकारों के विकास पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है तो इसकी झलक भरे मंच पर भी देखने को मिली थी।
पिछली कई सभाओं की तरह मोदी ने भाजपा को विकास का पर्याय बताते हुए 'एमपी के मन में है मोदी और मोदी के मन में है एमपी' को ही स्थापित कर दिया था।
चुनाव की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री शिवराज 230 में से 165 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार के लिए पहुंचे। औसतन प्रतिदिन 10 सभाएं कीं। दीपावली के दिन भी उन्होंने जनसभाओं का संबोधित किया। इसके पहले हर जिले में उन्होंने महिला सम्मेलन किया। सभाओं में वह कई बार भावुक भी हुए। यहां तक कहा, 'मामा चला जाएगा तो बहुत याद आएगा' और 'मर भी गया तो राख के ढेर से उठकर जनता की सेवा करूंगा'।