अरिहंत, अरिघात... भारत के पास दो-दो परमाणु पनडुब्बियां, लेकिन चीन के मुकाबले कितनी ताकतवर

Updated on 15-09-2024 04:58 PM
बीजिंग: भारत की दूसरी परमाणु शक्ति संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिघात को पिछले महीन के अंत से भारतीय नौसेना में ऑपरेशनल है। भारत के इस कदम से देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। खासकर, चीन की बढ़ती महत्वकांक्षाओं के बीच भारतीय नौसेना को यह परमाणु पनडुब्बी काफी मजबूत करेगी। इस परमाणु पनडुब्बी की मदद से भारत एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों पर नजर रख सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी भी चीन की तुलना में काफी पीछे चल रहा है, क्योंकि चीनी नौसेना अपने बेड़े के साथ-साथ अपनी जमीनी और हवाई क्षमताओं को भी बढ़ा रही है।

भारत को मिली दूसरी परमाणु पनडुब्बी


भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त को बंगाल की खाड़ी के तट पर भारत की पूर्वी नौसेना कमान के मुख्यालय विशाखापत्तनम नौसैनिक अड्डे पर कमीशनिंग समारोह में कहा कि परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी, आईएनएस अरिघात (संस्कृत में "दुश्मन का नाश करने वाला") इस क्षेत्र में "रणनीतिक संतुलन स्थापित करने में मदद करेगी।" हालांकि, यह संतुलन वर्तमान में चीन के पक्ष में झुका हुआ है। इसका प्रमुख कारण यह है कि संख्या के हिसाब से चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है।

चीनी परमाणु पनडुब्बियां कितनी ताकतवर


चीन के पास छह ऑपरेशनल जिन-क्लास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक पनडुब्बियां शामिल हैं, जबकि भारत के पास सिर्फ दो अरिहंत और अरिघात। जिन क्लास की पनडुब्बियां भारत की अरिहंत क्लास की पनडुब्बियों से मारक क्षमता में भी काफी आगे हैं। मिसाइल डिफेंस एडवोकेसी अलायंस के अनुसार, चीनी पनडुब्बियां कम से कम 8,000 किलोमीटर (4,970 मील) की रेंज वाली एक दर्जन बैलिस्टिक मिसाइलें ले जा सकती हैं और कई परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखती हैं।

भारतीय परमाणु पनडुब्बियों की ताकत जानें


ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस एजेंसी जेन्स के एक विश्लेषण के अनुसार, भारत की अरिहंत क्लास की दोनों पनडुब्बियां आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात 6,000 टन विस्थापन के साथ 366 फीट लंबी हैं। ये दोनों पनडु्ब्बियां K-15 सागरिका बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हैं, जिन्हें चार वर्टिकल लॉन्च ट्यूबों से लॉन्च किया जा सकता है। लेकिन, परमाणु-युक्त K-15 की सीमा केवल 750 किलोमीटर (466 मील) के आसपास मानी जाती है, जो हिंद महासागर से मारे जा सकने वाले लक्ष्यों को सीमित करती है।

चीन के मुकाबले भारतीय पनडुब्बियां कम शक्तिशाली


यूएस पैसिफिक कमांड के संयुक्त खुफिया केंद्र में संचालन के पूर्व निदेशक विश्लेषक कार्ल शूस्टर ने कहा, "INS अरिहंत-क्लास पनडुब्बियां उत्तरी बंगाल की खाड़ी के तटीय जल से चीनी लक्ष्यों तक मुश्किल से पहुंच सकती हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह इलाका एक पनडुब्बी के लिए खतरनाक रूप से उथला है।" भारत और चीन के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद है। 2020 से दोनों देशों की सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएएसी) के दोनों ओर डटी हुई हैं। वक्त-वक्त पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई बार भिड़ंत हो चुकी है।

जवाबी कार्रवाई के लिए क्षमता बढ़ा रहा भारत!


भारत अब तक अरिहंत क्लास पनडुब्बियों को लेकर खामोश ही रहा है। हालांकि इतना जरूर बताया गया है कि स्वदेशी तकनीक से निर्मित आईएनएस अरिहंत और अरिघात पीढ़ी दर पीढ़ी उन्नत हो रही हैं। आईएनएस अरिहंत को आठ साल पहले भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। भारत ने 29 अगस्त को कमीशन किए जाने के बाद से अरिघाट की तस्वीरें भी जारी नहीं की हैं। नौसेना विश्लेषकों का कहना है कि भारत स्पष्ट रूप से एक ऐसा परमाणु निवारक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो चीन के परमाणु निवारक जितना बड़ा तो नहीं होगा, लेकिन बीजिंग को उसके खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करने से रोकने के लिए पर्याप्त जवाबी कार्रवाई की क्षमता रखेगा।

भारत की चीन पर है पैनी नजर


भारत के पास लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ नई, बड़ी पनडुब्बियां हैं। विश्लेषकों के अनुसार, उन मिसाइलों की रेंज 6,000 किलोमीटर (3,728 मील) तक हो सकती है, जिससे चीन में कहीं भी हमला किया जा सकता है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स में परमाणु सूचना परियोजना के एसोसिएट डायरेक्टर मैट कोर्डा ने कहा, "हालांकि भारत की समुद्र आधारित परमाणु निवारक क्षमता अभी भी अपेक्षाकृत प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन देश की स्पष्ट रूप से एक परिष्कृत नौसैनिक परमाणु बल बनाने की महत्वाकांक्षा है, जिसके केंद्र में बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं।"

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