सऊदी को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा अमेरिका:बदले में देगा नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी

Updated on 20-05-2024 01:40 PM

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रविवार को अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) जेक सुलिवन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच सिक्योरिटी अकॉर्ड और सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट पर चर्चा हुई।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, समझौते के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा और परमाणु सहायता देगा। दरअसल, पिछले साल इजराइल और सऊदी अरब के बीच डिप्लोमैटिक रिश्ते शुरू करवाने के लिए अमेरिका बैकडोर बातचीत कर रहा था।

इस दौरान उसने इजराइल को मान्यता देने के बदले सऊदी को नाटो लेवल की सिक्योरिटी देने की पेशकश की थी। इस साल मई की शुरुआत में एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका और सऊदी अरब सिक्योरिटी और परमाणु सहायता वाले एग्रीमेंट साइन करने के बेहद करीब हैं।

न्यूक्लियर असिस्टेंस के बदले दूसरे देशों को खुफिया जानकारी न देने की शर्त
US एटॉमिक एनर्जी एक्ट 1954 के तहत अमेरिका कुछ शर्तों पर दूसरे देशों को परमाणु सहायता दे सकता है। इसके लिए इन देशों को 9 शर्तों को पूरा करना होगा। इनमें परमाणु हथियार बनाने के लिए न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न करने और दूसरे देशों को खुफिया जानकारी साझा नहीं करने की बात कही गई है।

क्राउन प्रिंस के 'विजन 2030' प्लान के लिए अहम न्यूक्लियर एनर्जी
सऊदी दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। हालांकि सऊदी क्राउन प्रिंस देश की अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता को कम करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने 'विजन 2030' प्लान भी बनाया है।

इस प्लान के लिए सऊदी रिन्यूएबल एनर्जी जनरेट करते हुए उत्सर्जन को कम करना चाहता है। न्यूक्लियर एनर्जी इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम साबित होगी। इसके अलावा सऊदी कई बार ये कह चुका है कि अगर ईरान ने परमाणु बम बनाए तो वह खुद भी ऐसा करने से पीछे नहीं हटेगा।

अमेरिका की मदद से सऊदी परमाणु तकनीक में महारत हासिल करना चाहता है। इसके जरिए वह अमेरिका के विरोध के बावजूद जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियार बनाने में सक्षम होगा।

मिडिल ईस्ट में पकड़ मजबूत करना चाहता है अमेरिका
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बाइडेन प्रशासन सऊदी अरब के साथ डील करके इजराइल को मान्यता दिलवाना चाहता है। अगर एक बार सऊदी और इजराइल के बीच डिप्लोमैटिक रिश्ते बहाल हो गए, तो मिडिल ईस्ट के कई दूसरे देश भी इजराइल को मान्यता दे सकते हैं। इससे अमेरिका को वहां ईरान के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बनाने में मदद मिलेगी।

दूसरी तरफ, चीन के साथ वर्चस्व की लड़ाई के बीच मिडिल ईस्ट पर अमेरिका की पकड़ मजबूत हो जाएगी। साथ ही सऊदी में न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने के लिए अमेरिका वहां अपनी इंडस्ट्री भी लगा सकता है। इससे वह ग्लोबल बिजनेस के मामले में रूस और चीन की एटमी कंपनियों से एक कदम आगे निकल जाएगा।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 24 September 2026
वॉशिंगटन: भारत 'मिडिल पावर्स' (मध्यम दर्जे की ताकतों) के एक नए मल्टीलेटरल (बहुपक्षीय) ग्रुप में शामिल हुआ है। यह ग्रुप पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म (P4M) है। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने…
 24 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने मक्का समझौते के जरिए सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं। साथ ही खाड़ी देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की उसकी…
 24 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के दोस्त ने साइप्रस ने तुर्की को करारा जवाब दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति ने निकोस क्रिस्टोलाइट्स ने महासभा को संबोधित…
 24 September 2026
तेहरान: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की न्यूयॉर्क में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ सीधी बातचीत पर तेहरान में कट्टरपंथी भड़क गए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड…
 24 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर दुनिया के सामने सिंधु जल संधि (IWT) का मामला उठाया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन' (OIC) के जम्मू-कश्मीर कांटेक्ट ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। न्यूयॉर्क में हुई इस…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक को संबोधित करते हुए कश्मीर का राग अलापा। उन्होंने कश्मीर पर बातचीत करने और…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भारत के साथ अपनी अटूट दोस्ती को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। पीएम…
 23 September 2026
न्यूयॉर्क: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका, भारत और चीन, रूस पर दबाव डालें तो वह यूक्रेन में युद्ध जारी नहीं रख पाएगा। जेलेंस्की ने कहा…
Advt.