भोपाल। पंडित रमाकांत गुंदेचा, प्रोफेसर चांदमल गुंदेचा ,उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर एवं उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर की स्मृति को समर्पित स्मरण-23 समारोह का शुभारंभ शुक्रवार की शाम ध्रुपद संस्थान गुरुकुल में हुआ। इस मौके पर धानी गुंदेचा के ध्रुपद गायन और रूपक कुलकर्णी के बांसुरी वादन की प्रस्तुति हुई। इस अवसर पर गुरुकुल में अखिलेश, शंपा शाह,रहीम मिर्जा,देवीलाल पाटीदार, भज्जू श्याम, युसूफ, एलएन भावसार, रेणू गुंदेचा सहित देश के प्रतिष्ठित चित्रकारों एवं शिल्पकारों की प्रदर्शनी का शुभारंभ संस्कृति संचालक आदिति कुमार त्रिपाठी, रविंद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय की उप कुलपति डा संगीता जौहरी, बांसुरी वादक पंडित रूपक कुलकर्णी,पंडित उमाकांत गुंदेचा ने किया।
राधिका मुखना बनाए...
कलाकृतियों के अवलोकन के पश्चात धानी गुंदेचा का ध्रुपद गायन हुआ। धानी ने राग जय-जयवंती में परंपरागत आलाप जोड़ झाला प्रस्तुत करते हुए चौताल में निबद्ध एक ध्रुपद प्रस्तुत किया। उन्होंने राधिका मुखना बनाए... के बाद राग सोहनी में एक ध्रुपद भी प्रस्तुत किया। धानी ने अपने कार्यक्रम का समापन राग सोहनी में निबद्ध ध्रुपद से किया। ध्रुपद संस्थान के शिष्य ज्ञानेश्वर देशमुख ने पखावज पर सटीक संगत की।
बांसुरी से निकले राग कल्याण के सुर
पहले दिन की सभा का समापन मुंबई से पधारे विख्यात बांसुरी वादक पद्म विभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के पट शिष्य पंडित रूपक कुलकर्णी के बांसुरी वादन से हुआ। पंडित रूपक ने बांसुरी वादन के लिए राग श्याम कल्याण चुना। इसके अंतर्गत आपने ध्रुपद अंग से आलाप जोड़ और झाला करते हुए तीन ताल में एक बंदिश सुनाई। समापन में एक धुन भी सुनाई। उनके साथ तबले पर पंडित हिंडोल मजूमदार ने बहुत सूझबूझ के साथ संगत की। कार्यक्रम का संचालन कला समीक्षक एवं उद्घोषक विनय उपाध्याय ने किया।