अवधपुरी में रहने वाले उज्जवल (परिवर्तित नाम) की मां ने बताया कि उनके बेटे और बेटी अलग -अलग कक्षा में हैं। उनके बस्तों का वजन लगभग चार किलो तक है। दोनों बच्चे कभी-कभी तो पूरी पुस्तक नहीं ले जा पाते हैं।
- प्रत्येक स्कूल को नोटिस बोर्ड एवं कक्षा में बस्ते के वजन का चार्ट प्रदर्शित करना होगा।
- स्कूल डायरी का वजन भी बस्ते के वजन में ही शामिल किया जाए।
- स्कूल बैग हल्के वजन के हों, जो कंधों पर आसानी से फीट हो सके।
- कक्षा दूसरी तक के बच्चों को गृह कार्य नहीं दिया जाएगा।
- तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों को प्रति सप्ताह अधिकतम दो घंटे का गृह कार्य दिया जाए।
- छठवीं से आठवीं तक प्रतिदिन एक घंटे और नौवीं से 12वीं तक के छात्रों को प्रतिदिन दो घंटे गृह कार्य दिया जाए।
यह तय किया गया था बस्तों का वजन
कक्षा - वजन की सीमा (किलोग्राम में)
पहली - 1.6 - 2.2
दूसरी - 1.6 - 2.2
तीसरी - 1.7 - 2.5
चौथी - 1.7 - 2.5
पांचवीं - 1.7 - 2.5
छठवीं - 02- 03
सातवीं - 02- 03
आठवीं - 2.5 - 4.0
नौवीं - 2.5 - 4.5
दसवीं - 2.5 -4.5
इनका कहना है
स्कूलों में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए निरीक्षण निरंतर किया जा रहा है और अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं निजी स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लगाने आदेश जारी कर दिए हैं। कक्षा के अनुसार बच्चों के बस्तों का वजन पहले से तय हैं इनकी जांच कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।
- आशीष सिंह, कलेक्टर, भोपाल
स्कूल में बच्चों के बस्तों के वजन की जांच करने के लिए योजना तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसके तहत निरीक्षण शुरू किया जाएगा। इस दौरान यदि तय मानक से अधिक बच्चों के बस्तों का वजन निकला और अन्य नियमों का पालन शाला प्रबंधन द्वारा नहीं किया जाना पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
- अंजनी कुमार त्रिपाठी, जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल
यह बात सही है कि स्कूली बच्चों के बैग को लेकर निरीक्षण करना है, ताकि पता लगाया जा सके कि किसी बच्चे के बैग में निर्धारित से अधिक वजन तो नहीं है। इसमें देरी हुई है, लेकिन निरीक्षण की रणनीति बना ली है। सभी को मिलकर निरीक्षण करना है। समय नहीं मिलने के कारण निरीक्षण में देरी हुई है। प्रयास है कि जिस दिन जो विषय पढ़ाएं जाएं, उन्हीं विषयों से जुड़ी पठन सामग्री बच्चों के बैग में रखी जाए। स्कूलों से यह व्यवस्था बनवाएंगे।