ईरान के 'केनेडी' अली लारीजानी की मौत से टूटेगा श‍िया देश या और तेज होगी लड़ाई? एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

Updated on 18-03-2026 12:54 PM
तेहरान: अमेरिका-इजरायल गठबंधन से चल रहे युद्ध में ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लाराजीनी की मौत हो गई है। अली लारीजानी इस संघर्ष की शुरुआत से ही ईरान की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति के मुख्य सूत्रधार बने हुए थे। मंगलवार को उनकी मौत का ऐलान करते हुए इजरायल ने इसे अपनी ऐसी सफलता की तरह पेश किया है, जो तेहरान में सत्ता को हिला सकती है। दूसरी ओर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लारीजानी की मौत से इस लड़ाई के लंबा खिंचने का अंदेशा पैदा हो गया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, 67 साल के लारीजानी तेहरान की सत्ता की सत्ता एक जाना-पहचाना चेहरा थे। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद इजरायल के निशाने पर होने के बावजूद वह सार्वजनिक रैलियों में दिखे और बयान जारी करते रहे। युद्ध में देश को एकजुट रखने के लिए भी लारीजानी की ओर से लगातार कोशिश की जा रही थी।

क्यों अहम थे अली लारीजानी

एक्सपर्ट का कहना है कि लारीजानी ईरानी नेतृत्व के एक समझदार, सुलझे हुए और कद्दावर शख्स थे। उनकी मौत से ईरान ने एक ताकतवर आवाज को खो दिया है। वह इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी बातचीत में एक अहम पिलर बन सकते थे। उनकी मौत से बातचीत की कोई भी कोशिश मुश्किल हो जाएगी।
जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के विजिटिंग फेलो हामिदरेज अजीजी कहते हैं, 'लारीजानी ने दशकों तक सिस्टम के केंद्र में काम किया। उन्हें समाज के ऊंचे तबके के अलग-अलग हिस्सों में विश्वसनीयता हासिल थी। टाइम पत्रिका ने साल 2009 में लारीजानी के प्रभाव को देखते हुए उनको 'ईरान का केनेडी' कहा था।'

अली लारीजानी का मजबूत कद

अजीजी के मुताबिक, लारीजानी की मौत से युद्ध का राजनीतिक प्रबंधन पेचीदा हो जाएगा। इसकी वजह है कि ईरान के राजनीतिक संदेशों पर अली की जबरदस्त पकड़ थी और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्क बहुत मजबूत थे। युद्ध खत्म करने के संभावित समझौते के लिए लारीजानी जैसे कद के व्यक्ति की जरूरत थी। अब युद्धविराम वार्ता आसान नहींहोगी।
अली लारीजानी बीते 50 साल से तेहरान में अलग-अलग पदों पर रहे थे। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), सुरक्षा तंत्र, सरकारी मीडिया और संसद में अहम पदों पर काम किया। अजीजी का कहना है कि अगर राष्ट्रपति पद को छोड़ दिया जाए तो वह लगभग सभी बड़े पदों पर रहे। तेहरान में उनके जैसे तजुर्बे के बहुत कम लोग हैं।

पश्चिमी देशों में भी थी पहचान

अली लाराजानी ने 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध के दौरान IRGC कमांडर के तौर पर काम किया और बाद में सरकारी प्रसारक के प्रमुख बने। लारीजानी ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार भी रहे थे। पश्चिमी राजनयिकों ने उनके साथ बातचीत के बाद उनको एक सुलझा हुआ और बुद्धिमान व्यक्ति बताया था।

लारीजानी 12 सालों तक ईरान की संसद के स्पीकर रहे। पिछले साल इजरायल के साथ 12 दिन के संघर्ष के बाद लारीजानी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख के तौर पर देश के सबसे अहम फैसला लेने वाले व्यक्ति के तौर पर उभरे। ऐसे में उनकी कमी ना सिर्फ ईरान को बल्कि युद्ध में मध्यस्थता की कोशिश करने वालों को भी खलेगी।

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