छोटे निवेशकों की पहुंच में आएगा बॉण्ड मार्केट? यहां जानिए सभी सवालों के जवाब

Updated on 02-05-2024 01:52 PM
नई दिल्ली: अक्सर निवेशक बॉण्ड्स में उनसे मिलने वाले आकर्षक रिटर्न के बावजूद निवेश करने से चूक जाते हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें निवेश के लिए मिनिमम टिकट साइज एक लाख रुपये होती है। लेकिन अब डेट (Debt) मार्केट में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिहाज से सेबी ने कॉरपोरेट बॉण्ड की फेस वैल्यू एक लाख रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ऐसे में कंपनियां 10,000 रुपये फेस वैल्यू वाले बॉण्ड जारी कर सकती हैं। सेबी के इस कदम की तारीफ करते हुए जेरोधा के फाउंडर नितिन कामथ ने अपनी पोस्ट में कहा, 'हमारा मानना रहा है कि ज्यादातर भारतीयों के लिए शायद स्टॉक नहीं, बॉण्ड सही कदम है। FD रिटर्न से बेहतर, लेकिन स्टॉक से कम रिस्क। लेकिन बॉण्ड एक HNI प्रोडक्ट रहे हैं, और किसी ने उन्हें रिटेल को नहीं बेचा, लेकिन सेबी के अहम बदलाव से निवेशकों को फायदा होने की उम्मीद है। ऐसे में बॉण्ड बाजार मे नॉन-इंस्ट्यूशनल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए के लिए किए गए इस बदलाव के बाद देखना होगा कि कंपनियां रिटेल निवेशकों का कितना वेलकम करती है। इसके साथ ही यह दिलचस्प रहेगा कि रिटेल निवेशको के लिए यह असेट क्लास कितना मुफीद रहता है।
क्या होगा फायदा?
Edelweiss Asset Management के फिक्सड इनकम के President & CIO धवल दलाल का मानना है कि 'सेवी का यह कदम बॉण्ड मार्केट को बढ़ाने और उसमें रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने वाला है। हां, इसका सही रूप तब सामने आएगा, जब रिटेल निवेशकों की समझ बॉण्ड मार्केट में बढ़ेगी। बॉण्ड मार्केट, स्टॉक मार्केट या एफडी की तरह नहीं है। इसके पैरामीटर्स अलग है। ऐसे में जैसे-जैसे रिटेल निवेशकों में जागरूकता बढ़ेगी, इस उनकी पहुंच बढ़ेगी।'
क्या छोटे निवेशक आएंगे?
फाइनैंशल प्लानर्स का कहना है कि रिटेल निवेशकों को इसे एफडी की तरह नहीं समझना चाहिए एफडी में निवेश की गई रकम की एक तरह से गारंटी होती है। वहीं कॉरपोरेट बॉन्ड में उनकी रेटिंग, अंटरलाइंग स्ट्रेंथ, रिलेटिव स्ट्रेंथ से लेकर कई तरह के फाइनैंशल पैरामीटर्स होते हैं। ऐसे में इसकी रिस्क को समझाना जरूरी है।
कैसे होगी भागीदारी?
प्राइवेट प्लेटमेंट मोड के जरिए एनसीडी या एनसीआरपीएस (NCDs or NCRPS) में रिटेल निवेशक भागीदारी कर पाएंगे। एक्सपर्ट कार्तिक झवेरी का कहना है कि सेबी ने एक मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की आवश्यकता के साथ इशूअर को 10,000 रुपये के फेस वैल्यू पर प्राइवेट प्लेसमेंट मोड के माध्यम से NCDs or NCRPS जारी करने का विकल्प प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ये NCDs and NCRPS प्लेन वेनिला टाइप, जो ब्याज/ डिविडेड वाले इंस्ट्रूमेंट्स होंगे।
क्या है NCD?
NCD यानी कि नॉन कनवर्टिबल डिबेंचर एक फाइनैंशल इंस्ट्रूमेंट होते हैं। इसका इस्तेमाल कंपनियां पब्लिक इशू के जरिए पैसा जुटाने के लिए करती हैं। NCD की एक फिक्स्ड मैच्योरिटी डेट होती है और इसमें निवेशकों को एक निश्चित ब्याज दर के साथ रिटर्न मिलता है। जानकारों का कहना है कि बॉण्ड हर हाल में बेहतर और सुरक्षित निवेश विकल्प है।

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