भारत के खिलाफ अगली जंग में पाकिस्तान दागेगा लंबी दूरी की मिसाइलें? मुनीर के हाथ 'परमाणु कमांड सेंटर', कितना खतरा?

Updated on 18-11-2025 02:20 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के संविधान में 27वां संशोधन कर आर्मी चीफ असीम मुनीर को देश का 'तानाशाह' बना दिया गया है। असीम मुनीर को संविधान संशोधन के बाद अब चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बना दिया गया है, जबकि चेयरमैन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब ये हुआ कि अब तीनों सेनाओं, सामरिक योजनाओं और परमाणु कमान का कंट्रोल सीधे एक व्यक्ति के हाथ में आ गया है।

पाकिस्तान ने ऐसा मई महीने में भारत के हाथों मिली करारी हार के बाद किया है। मई संघर्ष में पाकिस्तान, भारत के हमलों को रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ था। ऐसा करके पाकिस्तान ने रक्षा बजट, सैन्य संसाधन का मैनेजमेंट और रक्षा संसाधनों की आपातकालीन खरीद को भी एक ही शख्स, यानि असीम मुनीर के हाथों में दे दिया है।
असीम मुनीर के पास परमाणु कमांड सेंटर
पाकिस्तान में जो नया संविधान संशोधन किया गया है, उसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान की परमाणु संरचना पर पड़ा है। नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (NSC) की स्थापना के साथ ही पहले CJCSC के पास मौजूद 'न्यूक्लियर मैनेजर' का कंट्रोल अब पूरी तरह से असीम मुनीर के हाथों में आ गया है, जिसे प्रधानमंत्री, CDF की सिफारिश पर नियुक्त करेंगे। यह 2000 के बाद से पहला बड़ा पुनर्गठन है, जब तीनों सेनाओं के अपने-अपने स्ट्रैटेजिक कमांड थे और इन्हें SPD के माध्यम से कॉर्डिनेट किया जाता था। अब कमांडर NSC सीधा CDF को रिपोर्ट करेगा, जो खुद नई बनाई गई आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) की देखरेख भी कर रहे हैं।
पाकिस्तान ने मई 2025 में भारत के साथ चले चार दिनों के संघर्ष के बाद रॉकेट फोर्स का गठन किया है, जिसका मकसद लंबी दूरी की मिसाइलों को जल्द लॉन्च करना है। इसका मकसद ईरान की तरह लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करना है, जिससे परमाणु युद्ध की नौबत ना आए। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान अब सामरिक परमाणु हथियारों पर निर्भरता कम कर, आधुनिक मिसाइल क्षमताओं पर ज्यादा निवेश करना चाहता है, जबकि SPD की भूमिका अब सिर्फ रणनीतिक परमाणु प्रतिरोध के रखरखाव तक सीमित हो जाएगी।

परमाणु और मिसाइल, दोनों पर असीम मुनीर का कंट्रोल

इस संविधान संशोधन का एक और पहलू ये है कि COAS–CDF अब परमाणु और मिसाइल, दोनों कमांडों पर डायरेक्ट कंट्रोल करेंगे। पुराने ढांचे के तहत CJCSC, SPD और तीनों सेनाओं के रणनीतिक विभागों के बीच खिंचाव आता रहता था और इससे फैसला लेने में देरी होती थी। लेकिन, नए मॉडल में यह जोखिम काफी कम हो जाता है और पाकिस्तान की सेना हमले की स्थिति में तेज फैसले ले सकेगी।

इसके साथ ही यह ढांचा अमेरिका, चीन और खाड़ी देशों जैसे साझीदारों के साथ पाकिस्तान की सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को आसान बनाता है। क्योंकि अब सारा फैसला एक ही अधिकारी को लेना होगा। ये बदलाव इस ओर संकेत करता है कि पाकिस्तान आने वाले वर्षों में लंबी दूरी की मिसाइलों, पारंपरिक रॉकेट फोर्स और हवाई शक्ति में तेजी से निवेश बढ़ाने जा रहा है, ताकि भारत के खिलाफ अगले जंग में वो तत्काल हमला करने की स्थिति में आ पाए

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