क्या यूपीए 2 पर हमलों का बदला ले पाएगी कांग्रेस या अडानी मुद्दे पर भी राफेल जैसे ही फेल होंगे राहुल?

Updated on 13-02-2023 06:11 PM
नई दिल्ली : कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी लंबे समय से अडानी-अंबानी को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार को घेरते रहे हैं। हाल ही में आई हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में जिस तरह से अडानी ग्रुप को लेकर सवाल उठाए गए, उससे कांग्रेस को नई ताकत मिल गई है। क्या वह 2024 के आम चुनावों से पहले इस मुद्दे को उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बना सकती है? कहीं इस मुद्दे का हश्र भी राफेल डील की गड़बड़ी की तरह तो नहीं हो जाएगा? इन सबसे भी बड़ा सवाल है कि क्या यूपीए 2 सरकार के दौर में बीजेपी के हमलों का बदला लेने में कांग्रेस और गांधी परिवार सफल हो पाएगी? बजट सत्र के दौरान लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में जिस तरह देश-विदेश में मिले अडानी ग्रुप के प्रोजेक्ट और ठेके के लिए पीएम और केंद्र सरकार की आलोचना की, उससे जाहिर होता है कि पार्टी इस मुद्दे को आसानी से नहीं छोड़ने वाली।

राफेल पर चूका निशाना


2019 के चुनाव से पहले राफेल मामले को कांग्रेस खासकर राहुल गांधी ने बीजेपी नीत केंद्र सरकार के खिलाफ एक माहौल बनाने की कोशिश की थी। उस दौरान राहुल गांधी पीएम मोदी के खिलाफ बार-बार नारे लगाते दिखे थे। राफेल सौदे पर राहुल ने देश की सरकारी कंपनी HAL की अनदेखी की मोदी सरकार पर अंबानी को रक्षा सौदा दिलाने और उनकी कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर आरोप टिके नहीं। इसकी एक बड़ी वजह रही कि राफेल का मुद्दा कभी भी आमजन से नहीं जुड़ पाया। इस मुद्दे पर कांग्रेस को विपक्षी दलों का भी साथ नहीं मिला। राफेल की लड़ाई में कांग्रेस अकेली दिखी।

यह मुद्दा अलग


राफेल के उलट कांग्रेस को लगता है कि LIC और SBI जैसे सरकारी उपक्रमों का पैसा अडानी की कंपनियों में जिस तरह से लगा है, उससे कहीं न कहीं देश का आम मतदाता सीधे प्रभावित होता है। कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की कोशिश कर रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के अलावा तमाम विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।

कांग्रेस की दुखती रग


अडानी मुद्दे पर आक्रामक तरीके से केंद्र सरकार को घेरने के पीछे कहीं न कहीं कांग्रेस की अपनी दुखती रग भी मानी जा सकती है। इसे 2G और कोलगेट की कसक भी कह सकते हैं। 2014 में जिस तरह से UPA-2 सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते गई, उसके मद्देनजर कांग्रेस को अडानी विवाद एक ऐसे मुद्दे की तरह नजर आ रहा है, जिसे लेकर वह मोदी सरकार को वैसे ही घेर सकती है। 2014 में समूचे विपक्ष ने मिलकर तत्कालीन सरकार के खिलाफ माहौल बनाया था। अडानी मुद्दे पर कांग्रेस भी लगातार संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराए जाने की मांग पर उसी तरह से अड़ी दिख रही है, जैसे 2G मामले पर ‌BJP ने JPC की मांग को लेकर लगातार संसद के दो सत्रों में गतिरोध बनाए रखा था। अडानी मुद्दे को लेकर कांग्रेस लोगों के बीच पीएम मोदी और एनडीए सरकार के दामन पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के वैसे ही दाग दिखाने की कोशिश कर रही है, जैसे बीजेपी ने UPA सरकार को लेकर की थी।

बोफोर्स-कॉमनवेल्थ की भी फांस


अडानी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के आक्रामक रुख के पीछे सिर्फ 2G मामला और कोयला घोटाला विवाद ही नहीं हैं, बल्कि बोफोर्स और कॉमनवेल्थ घोटाला भी हैं। इन सभी आरोपों का जिक्र हाल ही में संसद में पीएम ने संबोधन में कांग्रेस द्वारा उन पर किए गए हमले के जवाब में किया था। पीएम इन तमाम मुद्दों को लेकर कांग्रेस राज में हुए भ्रष्टाचार से जोड़ते दिखे थे। बोफोर्स एक ऐसा मसला है, जिसमें उंगली सीधे गांधी परिवार पर उठी थी। ऐसे में बोफोर्स कांग्रेस ही नहीं, गांधी परिवार के भी कलेजे में चुभी कील की तरह है। यही वजह थी कि बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ जब राफेल का मुद्दा आया तो कांग्रेस और राहुल गांधी ने पूरी ताकत से इसे उठाने की कोशिश की थी।

अडानी विवाद से उम्मीद


अडानी विवाद से कांग्रेस को उम्मीदें दिख रही हैं। पार्टी को लगता है कि अडानी मामले में जिस तरह से पीएम और अडानी ग्रुप के रिश्ते सामने आए हैं, उन्हें लोगों के सामने रखकर पीएम और बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया जा सकता है। बीजेपी और खुद पीएम जिस तरह से एक ईमानदार और बेदाग सरकार देने का दावा करते रहे हैं, उसमें अडानी को लेकर पार्टी सवालिया निशान लगा सकती है। कांग्रेस आने वाले दिनों में विपक्ष के साथ मिलकर इस मुद्दे को और तेजी से उठाने की कोशिश करेगी, जिससे पीएम मोदी और उनकी सरकार की ईमानदार छवि को तोड़ा जा सके। इसका फायदा वह आने वाले चुनाव में ले पाए।

संदेश पहुंचाने की कोशिश


विदेशों में अडानी को मिले प्रोजेक्ट के लिए सीधे पीएम पर फायदा पहुंचाने का आरोप लगाकर कांग्रेस आम लोगों के बीच संदेश देना चाहती है। पार्टी चाहती है कि लोग यह समझें कि पीएम अपने मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए देश के आम लोगों की जेब में सेंध लगा रहे हैं। ऐसे में जमीन पर वह अडानी मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर 2024 में इसका लाभ लेना चाहती है।

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