इजरायल हमास युद्ध में शांति का मसीहा बनेगा चीन? मिडिल ईस्ट में शी जिनपिंग की मंशा क्या है

Updated on 21-11-2023 01:16 PM
बीजिंग: चीन ने इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध का हल निकालने के लिए मध्य पूर्व के देशों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में शामिल मध्य पूर्व के देशों ने इजरायल को दोषी ठहराया और कहा कि इजरायल, फिलिस्तीनियों की मौजूदगी को खत्म करना चाहता है। इससे यह बात तो तय है कि बैठक में इजरायल को सभी फसाद के लिए दोष देने से कोई हल नहीं निकलने वाला है। चीन की मंशा भी इजरायल फिलिस्तीन विवाद को खत्म करने की नहीं थी। ऐसे में सवाल उठता है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आखिर किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मध्य पूर्व के देशों को बीजिंग में आमंत्रित किया था।

मध्य पूर्व में चीन का मकसद क्या है


चीन का उद्देश्य मध्य पूर्व के मामलों में ज्यादा से ज्यादा दखल देकर अपनी उपस्थिति को मजबूत करना है। इसके अलावा, चीन यह भी चाहता है कि वह मध्य पूर्व में अमेरिकी अनुपस्थिति का भरपूर फायदा उठाए और उस जगह को तेजी से भर ले। चीन इस दांव में काफी हद तक कामयाब भी हुआ है। उसने इसी साल सऊदी अरब और ईरान में दोस्ती कराई थी, जो दशकों से एक दूसरे के दुश्मन थे। इसके अलावा चीन ने संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, सऊदी अरब समेत खाड़ी के कई देशों के साथ सैन्य संबंधों को भी मजबूत किया है। ओमान में तो चीन एक नया विदेशी सैन्य अड्डा भी स्थापित करने जा रहा है।

फिलिस्तीन के बहाने मुस्लिम देशों पर डोरे डाल रहा चीन


चीन ने साल भर पहले ही इजरायल और फिलिस्तीनी प्रशासन को उनके बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का ऑफर दिया था। हालांकि, अमेरिका के करीबी इजरायल ने चीन के इस ऑफर को तुरंत खारिज कर दिया था। 7 अक्टूबर के हमास के हमले के बाद जब इजरायल ने गाजा पट्टी पर हमला शुरू किया तो चीन को इसमें भी मौका दिखा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने तुरंत सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद को फोन मिलाया और उनकी हां में हां मिलानी शुरू कर दी। वांग यी ने सऊदी विदेश मंत्री से कहा था कि इजरायल की कार्रवाई आत्मरक्षा से परे हो गई है। उन्होंने और दूसरे चीनी अधिकारियों ने तत्काल युद्धविराम करने और यथास्थिति को कायम करने का आह्वान किया था।

चीनी राजनयिक लगा रहे मध्य पूर्व के चक्कर

इजरायल और फिलिस्तीन में संघर्ष को समाप्त करने के लिए चीन ने बार-बार दो-राज्य समाधान का आह्वान किया है। इस युद्ध में अब गाजा में 13,000 से अधिक फिलिस्तीनी लोग और इजरायल में लगभग 1,200 लोग मारे गए हैं। बीजिंग के मध्य पूर्व दूत झाई जून ने पिछले महीने युद्ध को समाप्त करने के समाधान की तलाश में इस क्षेत्र का दौरा किया था और इजरायल और फिलिस्तीन को दो-राज्य समाधान तक पहुंचने में मदद करने के लिए रूस के साथ मिलकर काम करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

अमेरिका की जगह लेना चाहता है चीन


राजनीतिक विश्लेषक इब्राहिम फ्राइहत के अनुसार, इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर बीजिंग की बुलाई बैठक इस बात का संकेत है कि चीन अमेरिका द्वारा छोड़े गए शक्ति शून्य को भरकर अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को आगे बढ़ा रहा है। दोहा इंस्टीट्यूट फॉर ग्रेजुएट स्टडीज के फ्राइहत ने अल जजीरा को बताया, अमेरिका ने अपना सारा वजन इजरायल के पक्ष में फेंककर खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है और ऐसा करके उसने एक विश्वसनीय तीसरे पक्ष के हस्तक्षेपकर्ता के रूप में अपनी भूमिका कम कर दी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन की वीटो शक्ति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "वे (चीनी अधिकारी) इस भूमिका में बहुत रुचि रखते हैं - उनके इजरायल के साथ मजबूत संबंध हैं, उन्हें फिलिस्तीनियों का विश्वास है और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली में वजन है।"


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