खुद हिंदू फिर जितेंद्र आव्हाण को क्यों है सनातन से इतनी चिढ़? जानिए NCP नेता की नफरत-मोहब्बत वाली पॉलिटिक्स

Updated on 04-08-2025 01:50 PM
मुंबई: मालेगांव ब्लास्ट में सभी हिंदुओं आरोपियों के बरी होने के जारी बयानबाजी के बीच शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाण के बयान पर राजनीति गरमा गई हैं। उन्होंने सनातन धर्म पर तीखी टिप्पणी की है। आव्हाण ने कहा कि सनातन ने ही देश को बर्बाद किया है। इसके बाद जितेंद्र आव्हाण बीजेपी समेत तमाम दलों के निशाने पर आ गए हैं। उनके बयान पर खूब विवाद हो रहा है लेकिन आव्हाण अपने बयान पर कायम हैं। खुद एक हिंदू परिवार में जन्में जितेंद्र आव्हाण सनातन धर्म से इतना क्यों चिढ़ते हैं इसके लेकर राजनीतिक प्रेक्षक उनकी नफरत और मोहब्बत वाली पॉलिटिक्स को जिम्मेदार मानते हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि जितेंद्र आव्हाण ठाणे के नौपाडा में वीर सावरकर मार्ग पर रहते हैं
शरद पवार हैं राजनीतिक गुरु
जितेंद्र आव्हाण महाराष्ट्र की सियासत में एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। जब शरद पवार ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर एनसीपी बनाई थी तब से जितेंद्र आव्हाण शरद पवार के साथ हैं। वे सनातन धर्म पर ऐसे वक्त पर टिप्पणी की है जब एक दिन बाद उनका जन्म है। 5 अगस्त, 1963 को जन्में जितेंद्र आव्हाण अभी 61 साल के हैं। आव्हाण वंजारी समुदाय से आते हैं। यह जाति महाराष्ट्र में ओबीसी में आती है। राजनीति विज्ञान डॉक्टरेट करने वाले जितेंद्र अव्हाण की शादी मुंबई के नामी यूनियन लीडर की बेटी से हुई हैं। जितेंद्र आव्हाण की एक बेटी है। जिसकी शादी एक क्रिश्चिचन परिवार में हुई है। आव्हाण को करीब से जानने वाले कहते हैं कि एनसीपी नेता को कंट्रोवर्सी काफी पसंद हैं। वे टाइमिंग के हिसाब से बयान देते हैं। जितेंद्र आव्हाण महाराष्ट्र के हाउसिंग मिनिस्टर भी रह चुके हैं।
अभी तक नहीं हारे हैं आव्हाण
अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की यूथ विंग के अध्यक्ष रह चुके जितेंद्र आव्हाण 1999 से शरद पवार के साथ हैं। जितेंद्र आव्हाण के अब तक राजनीतिक सफर में शरद पवार की बड़ी भमिका रही है। 2002 में जितेंद्र आव्हाण को शरद पवार ने ही एमएलसी बनाया था। इसके बाद वह 2008 में फिर विधान परिषद गए थे। 2009 में जितेंद्र आव्हाण चुनावी राजनीति में उतरे थे। उन्होंने ठाणे जिले में आने वाली मुंब्रा कलवा सीट से 15 हजार वोटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद से जितेंद्र आव्हाण मुस्लिम बहुल सीट से लगातार चार बार जीते चुके हैं। 2024 के चुनावों में जितेंद्र आव्हाण ने जीत का अंतर 1 लाख वोटों का कर लिया था। राजनीतिक प्रेक्षक कहते हैं कि जितेंद्र आव्हाण को उनके विवादित बयानों के लिए लोग ठाणे में जितनी नफरत करते हैं, मुंब्रा कलवा क्षेत्र में उतने ही उनके ज्यादा चाहने वाले हैं, क्योंकि राजनीति में डॉक्टरेट करने वाले आव्हाण हमेशा सेक्युलर कार्ड की राजनीति करते हैं।
आव्हाण को पंसद है ये राजनीति
राजनीतिक प्रेक्षक आव्हाण के द्वारा सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी को एक शॉर्प कमेंट बता रहे हैं। जिसमें आव्हाण ने जातिवाद और छुआछूट और शोषण का जिक्र करके फिर से शाहू-फुले और आंबेडकर वाला कार्ड खेला है। 2024 के चुनावों में अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने जितेंद्र आव्हाण के खिलाफ मुस्लिम कैंडिडेट उतारा था लेकिन जितेंद्र आव्हाण फिर भी न सिर्फ जीते बल्कि जीत का मार्जिन 96 हजार से अधिक वोटाें का कर लिया। जितेंद्र आव्हाण की अपने वंजारी समाज में भी अच्छी फैन फालोइंग है। राजनीतिक तौर पर अभी तक अजेय जितेंद्र आव्हाण ने महाराष्ट्र और अपने विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग को साथ लेकर एक मजबूत समीकरण बना रखा है। यही वजह है कि वे चतुराई से सनातन धर्म की कमियों के जरिए निशाना साधकर राजनीति कर ले जाते हैं।

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